इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC) संगीता श्रीवास्तव ने समाज में गिरते हुए नैतिक मूल्यों पर गहरी चिंता जाहिर की है. उन्होंने भाषा की मर्यादा को लेकर एक बहुत ही सख्त बयान दिया है.
वीसी का कहना है कि हमारा संविधान हम सभी को अपनी बात खुलकर कहने की आजादी देता है. हर नागरिक को अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता मिली हुई है. लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हम किसी को भी सरेआम गाली दें. अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी को अपशब्द कहना पूरी तरह से गलत है.
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में दिया कड़ा संदेश
VC संगीता श्रीवास्तव ने यह बातें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कहीं. शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था. इसी कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया.
स्पीच में उन्होंने शिक्षण संस्थानों के बिगड़ते माहौल पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि आज पूरे देश के शैक्षणिक संस्थान मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. कुछ अराजक तत्व इन संस्थानों का शांतिपूर्ण माहौल खराब कर रहे हैं. ऐसे लोगों की वजह से पढ़ाई और अनुशासन दोनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है.
हालांकि इस दौरान वीसी ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया. उन्होंने कहा कि देश को आगे ले जाने वाले लोगों का आजकल लगातार अपमान किया जा रहा है. जो लोग देश के नेतृत्व में अपना अहम योगदान दे रहे हैं, उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जाता है.
वीसी ने कहा कि कुछ अराजक तत्व ऐसे सम्मानित लोगों के खिलाफ बेहद गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. वे लोग अच्छे काम करने वालों को गालियां देकर खुद को सही साबित करने की कोशिश करते हैं. यह बहुत बुरी मानसिकता है.
पीएम मोदी और उनकी दिवंगत मां का किया जिक्र
संगीता श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली अभद्र भाषा पर बहुत दुख जताया. उन्होंने कहा कि आजकल लोग देश के प्रधानमंत्री तक को नहीं बख्शते हैं. उन्हें सरेआम गालियां दी जाती हैं. उनका अपमान किया जाता है.
वीसी ने कहा कि सबसे ज्यादा दुख की बात तो यह है कि लोग पीएम की उस मां को भी अपशब्द कहते हैं, जो अब इस दुनिया में भी नहीं हैं. उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया. उन्होंने कहा कि किसी भी मृत व्यक्ति या किसी की मां के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना बहुत ही शर्मनाक बात है.
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'हमारे संस्कार और सभ्यता आखिर कहां गए?'
स्पीच में वीसी ने देश की महान संस्कृति और पुराने संस्कारों की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि हम सभी दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं. इस देश का संविधान हमें बहुत ताकत देता है. हमें अपनी बात रखने का पूरा हक है. लेकिन विरोध के नाम पर गालियां देना हमारे संस्कार बिल्कुल नहीं हैं.
उन्होंने गहरी चिंता जताते हुए सवाल किया कि आज समाज से हमारे अच्छे मूल्य और संस्कार आखिर कहां गायब हो गए हैं? हमें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. विरोध करने का एक सभ्य तरीका होता है. हमें उसी दायरे में रहकर अपनी बात कहनी चाहिए. गालियां देकर कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता है.