तालिबान की ओर से लगातार हो रहे आत्मघाती हमलों के बीच विदेश मंत्री एस एम कृष्णा और उनकी अमेरिकी समकक्ष हिलेरी क्लिंटन सहित करीब 60 विश्व नेता मंगलवार को अफगानिस्तान के भविष्य पर चर्चा करेंगे और युद्धग्रस्त राष्ट्र की सुरक्षा तथा विकास संबंधी जरूरतों की रूपरेखा तैयार करेंगे.
कड़ी सुरक्षा के बीच विश्व नेता अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर चर्चा करेंगे. यह देश टिकाऊ शांति, सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने की अपनी कोशिशों में ‘महत्वपूर्ण निर्णायक मोड़’ पर है. अफगानिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इस देश में सत्तर के दशक के बाद विश्व नेताओं का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय जमावड़ा होगा. गौरतलब है कि अमेरिका नीत नाटो बलों पर तालिबान के हमले जारी हैं. गत जून में ही 79 सैनिकों की इन हमलों में मौत हो चुकी है.
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे कृष्णा भी इस सम्मेलन में भाग लेंगे. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि संभावना है कि वह अफगानिस्तान के राष्ट्र निर्माण के लिये जरूरी हर संभव मदद मुहैया कराने की भारत की प्रतिबद्धता को सम्मेलन में रेखांकित करेंगे. अपने आगमन के तुरंत बाद हामिद करजई से मिले कृष्णा ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति की देश में शांति, सुरक्षा और विकास लाने की कोशिशों का समर्थन किया.{mospagebreak}अगर तालिबान तत्वों के साथ सुलह से ‘वास्तविक शांति’ आती हो तो कृष्णा की करजई सरकार की ऐसी कोशिशों का समर्थन करने की भी संभावना है. बहरहाल, तालिबान या उसके जैसे किसी संगठन के साथ किसी भी तरह की सुलह को भारत चिंताजनक मानता है. काबुल में सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब करजई सरकार तालिबान तत्वों को मुख्यधारा में लाने के लिये शांति तथा सुलह योजना बनाने पर काम कर रही है.