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फैसले से राहत महसूस कर रहे मोदी तीन दिन रखेंगे उपवास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्साहित गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2002 के दंगों के लिए उनकी आलोचना करने वालों पर बरसते हुए ऐलान किया कि वह अपने राज्य में शांति, सौहार्द और एकता के लिए तीन दिन का उपवास करेंगे.

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नरेन्द्र मोदी
नरेन्द्र मोदी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्साहित गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2002 के दंगों के लिए उनकी आलोचना करने वालों पर बरसते हुए ऐलान किया कि वह अपने राज्य में शांति, सौहार्द और एकता के लिए तीन दिन का उपवास करेंगे.


मोदी ने नागरिकों के नाम जारी पत्र में कहा, ‘उच्चतम न्यायालय के फैसले से एक बात साफ है. 2002 के दंगों के बाद से आधारहीन और असत्य आरोपों के आधार पर मेरे और मेरी सरकार के खिलाफ जो अस्वस्थ वातावरण बनाया गया, उसका अंत हो गया है. पिछले दस सालों से, मुझे और गुजरात राज्य को बदनाम करना फैशन बन गया था.’


आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में से एक इस विवादास्पद मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें बदनाम करने वाले लोग गुजरात में किसी भी सकारात्मक विकास को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं और ऐसे लोगों ने राज्य को बदनाम करने में कोई भी कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी.

मोदी ने कहा कि राज्य में सामाजिक सौहार्द और भाईचारा बढ़ाने की अपनी जिम्मेदारी के तहत वह ‘सद्भावना मिशन’ शुरू करने जा रहे हैं.

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उन्होंने कहा, ‘इस सद्भावना मिशन के अंतर्गत, मैंने निर्णय किया है कि मैं शनिवार 17 सितंबर से तीन दिवसीय उपवास करूंगा. मेरा उपवास 19 सितंबर को संपन्न होगा. मैं मन से महसूस करता हूं कि इस उपवास से गुजरात में शांति, एकता और सौहार्द का वातावरण और सुदृढ़ होगा.


अपने पत्र में मोदी ने कहा, ‘यह कहना मुश्किल है कि उच्चतम न्यायालय के इस फैसले के बाद भी यह निंदा प्रचार रूकेगा या नहीं. लेकिन एक बात निश्चित है कि जो लोग झूठ फैला रहे हैं, उनकी विश्वसनीयता धूल में मिल गई है. इस देश के लोग इस तरह के तत्वों को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे.’

उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में विशेष जांच दल को निर्देश दिया कि गुलबर्ग सोसायटी मामले में वह अपनी अंतिम रिपोर्ट या आरोपपत्र निचली अदालत में दाखिल करे. इसे मोदी को मिली बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.


शीर्ष अदालत के इस फैसले के तुरंत बाद मोदी ने ‘ईश्वर महान है’ कह कर संक्षिप्त प्रतिक्रिया की थी.

अपने पत्र में मोदी ने कहा, ‘मशहूर कथन है कि ‘नफरत को नफरत से नहीं जीता जा सकता.’ हमारे देश की वास्तविक ताकत एकता और सौहार्द्र में है. अनेकता में एकता भारत की विशिष्ट पहचान है. हमारे सामाजिक जीवन में एकता को शक्ति प्रदान करना हमारी जिम्मेदारी है. एक सकारात्मक रूख के साथ बढ़ने का हमारे पास शानदार अवसर है.’ गुजरात के लोगों का उन्होंने आह्वान किया कि वे राज्य की गरिमा को बढ़ाने में योगदान के लिए मिल कर आगे आएं.

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उन्होंने कहा, ‘सद्भावना मिशन पूरी तरह समाज और देश को समर्पित है. मैं आशा करता हूं कि शांति, एकता और सौहार्द्र से गुजरात को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के हमारे प्रयासों से देश की भी प्रगति और विकास होगा.’


पत्र में उन्होंने दावा किया 2002 की घटना के बाद गुजरात शांति और विकास की ओर बढ़ा है. उन्होंने कहा, ‘2002 के बाद झूठे प्रचार, षडयंत्रों और आरापों के बावजूद गुजरात ने शांति, सौहार्द्र और प्रगति की ओर बढ़ने का कोई प्रयास नहीं छोड़ा.’ उच्चतम न्यायालय के फैसले को ‘महत्वपूर्ण निर्णय’ बताते हुए मोदी ने कहा कि इसकी विभिन्न राजनीतिक विशलेषकों और कानूनी विशेषज्ञों द्वारा अलग अलग ढंग से व्याख्या की जा रही है.

उनके अनुसार, ‘कुछ लोग इसे किसी की जीत तो किसी की हार बता रहे हैं. हर किसी का अपना दृष्टिकोण है.’

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