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'मुझे बदनाम करने के लिए विपक्ष ने साझा मोर्चा बनाया', आरोपों पर बोले CM भगवंत मान 

सीएम भगवंत मान ने अपने खिलाफ उठे विवाद पर पलटवार करते हुए भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल पर एकजुट होकर उन्हें धार्मिक मोर्चे पर बदनाम करने का आरोप लगाया है.

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पंजाब की राजनीति में धार्मिक और सियासी मोर्चे पर छिड़ा नया विवाद. (File Photo)
पंजाब की राजनीति में धार्मिक और सियासी मोर्चे पर छिड़ा नया विवाद. (File Photo)

पंजाब की सियासत में एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक मोर्चे पर बयानबाजी तेज हो गई है. हरियाणा पुलिस के एक बड़े खुलासे के बाद खड़े हुए विवाद पर पलटवार करते हुए सीएम भगवंत मान ने विरोधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बीजेपी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने मिलकर उन्हें बदनाम करने के लिए एक साझा मोर्चा तैयार कर किया है. विरोधी जब उनका राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर मुकाबला नहीं कर पाए, तो अब धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर उन्हें घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इस पूरे विवाद को खुद को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है.

भगवंत मान ने इस पूरे विवाद में हरियाणा का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां बीजेपी से जुड़े लोगों ने लैब कर्मचारियों पर भारी दबाव बनाया और उन्हें डराकर पैसों के लेन-देन का फर्जी बयान दिलाने की कोशिश की. सीएम मान ने सवाल उठाया कि अगर हमारी रिपोर्ट फर्जी है, तो फिर विपक्ष जिस रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगा रहा है, उसकी सच्चाई की गारंटी कौन देगा? यह पूरा मामला सिर्फ उन्हें बदनाम करने के लिए खड़ा किया गया है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस लड़ाई में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब सुखबीर बादल ने अकाल तख्त के सामने आकर खुद अपने गलत कामों और गुनाहों को कबूल किया था, तब उनके खिलाफ होर्डिंग्स लगाने का फैसला क्यों नहीं लिया गया. मान के मुताबिक, यह रवैया दिखाता है कि विपक्ष और उनसे जुड़ी संस्थाओं की कथनी और करनी में कितना बड़ा फर्क है.

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रिश्वत के आरोपों से गरमाई राजनीति

यह पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब गुरुग्राम पुलिस ने एक शिकायत के बाद अंकित और अरुण नाम के दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया. शिकायतकर्ता जसप्रीत सिंह का आरोप है कि पंजाब के कुछ अधिकारियों ने उसे एक होटल में बुलाकर 10 लाख रुपये दिए थे. उस पर दबाव बनाया गया कि वह वायरल वीडियो को लेकर एक फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करे, जिसमें यह दिखाया जाए कि वीडियो नकली है, उसमें दिखने वाला व्यक्ति कोई और है.

क्या है यह पूरा वीडियो विवाद?

दरअसल, यह पूरा मामला एक विवादित वीडियो से जुड़ा है. अकाल तख्त ने इसे सही माना था, इसी आधार पर सिख समुदाय से भगवंत मान का सामाजिक बहिष्कार करने को कहा था. इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने एक दूसरी फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश कर दावा किया कि वीडियो में दिखने वाला शख्स कोई हमशक्ल एक्टर है. अब इसी रिपोर्ट को फर्जी बताने, 10 लाख की रिश्वत देने के आरोपों ने मामले को पूरी तरह गरमा दिया है. कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया जहां भगवंत मान को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं, वहीं हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने कहा कि गुरुओं के नाम पर इस तरह की राजनीति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

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तमाम आरोपों को खारिज करते हुए सीएम भगवंत मान ने कहा कि वे इस पूरे मामले का सच पंजाब की जनता की अदालत पर छोड़ते हैं. लोग खुद समझदार हैं, वे विरोधियों के इस सियासी ड्रामे, दावों का असल सच खुद तय करेंगे.

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