सोशल मीडिया पर 'मैड संधू' के नाम से पहचान बनाने वाले मधुसूदन सिंह की हत्या के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है. पंजाब पुलिस से रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर और मधुसूदन के पिता भूपिंदर सिंह ने बेटे की मौत पर रोते हुए अपना दर्द बयां किया. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उनके बेटे का क्या कसूर था? पिता के मुताबिक, मधुसूदन पूरे परिवार के साथ-साथ कई जरूरतमंद लोगों का भी सहारा था. उसकी मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
आजतक से खास बातचीत में भूपिंदर सिंह ने बताया कि उनके बेटे का असली नाम मधुसूदन सिंह था. इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वह 'मैड संधू' के नाम से फेमस था. अपने अलग अंदाज और मेहनत के दम पर उसने युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाई थी. धीरे-धीरे उसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और कई सामाजिक व सार्वजनिक कार्यक्रमों में उसे मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया जाने लगा.
पिता का आरोप है कि मधुसूदन की बढ़ती लोकप्रियता और शोहरत से कुछ लोग उससे जलने लगे थे. उन्होंने दावा किया कि इसी रंजिश के चलते साजिश रचकर उनके बेटे की हत्या की गई.
'गरीब और जरूरतमंद लोगों की करता था मदद'
भूपिंदर सिंह के मुताबिक, मधुसूदन सिर्फ अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं उठाता था, बल्कि जरूरतमंद लोगों की भी मदद करता था. वह गरीब बच्चों की पढ़ाई और जरूरतमंद परिवारों के राशन का खर्च उठाता था. इसके अलावा उसने कई मेडिकल कैंप और रक्तदान शिविर आयोजित करवाए थे.
पिता ने बताया कि बाढ़ के दौरान भी मधुसूदन ने पीड़ितों की मदद की थी. वह गुरुद्वारों में सेवा और पाठ में भी हिस्सा लेता था. उसने एक सैलून भी खोल रखा था, जहां कई लोग काम करते थे. बेटे की मौत के बाद सैलून बंद हो गया है और वहां काम करने वाले लोगों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है.
'धमकियां मिल रही थीं, फिर भी सुरक्षा नहीं मिली'
मधुसूदन के पिता ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि उनके बेटे को पहले से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं. उन्होंने कहा कि इस संबंध में गृह विभाग और सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी दी गई थी. सीआईडी, इंटेलिजेंस और पंजाब पुलिस को भी खतरे के बारे में बताया गया था और सुरक्षा के लिए गनमैन की मांग की गई थी.
भूपिंदर सिंह का आरोप है कि इसके बावजूद मधुसूदन को स्थायी सुरक्षा नहीं दी गई. उनका कहना है कि अगर समय रहते पुलिस और सरकार ने धमकियों को गंभीरता से लिया होता और सुरक्षा मुहैया कराई होती तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता.
'सरकार का कोई प्रतिनिधि हाल पूछने नहीं आया'
बेटे की हत्या के बाद सरकार और प्रशासन की ओर से परिवार को लेकर संवेदनशीलता पर भी भूपिंदर सिंह ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हत्या के बाद इतना समय बीत जाने के बावजूद पंजाब सरकार का कोई प्रतिनिधि या मंत्री उनके परिवार का हाल जानने नहीं पहुंचा.
उन्होंने कहा कि परिवार पहले ही बेटे को खोने के दर्द से गुजर रहा है और अब आर्थिक मुश्किलों का भी सामना करना पड़ रहा है.
छोटे बेटे के लिए सरकारी नौकरी की मांग
मधुसूदन की मौत के बाद परिवार में अब बुजुर्ग माता-पिता और छोटा बेटा अर्शदीप सिंह हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने का हवाला देते हुए भूपिंदर सिंह ने पंजाब सरकार से छोटे बेटे को सरकारी नौकरी देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि उन्हें सहानुभूति के आधार पर पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर या किसी उपयुक्त पद पर नौकरी दी जाए, ताकि परिवार का गुजारा चल सके.
परिवार ने पुलिस से मधुसूदन की हत्या में शामिल आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने और मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. पिता का कहना है कि उन्हें अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहिए और परिवार को उम्मीद है कि पुलिस हत्यारों को जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाएगी.