देश की तमाम पार्टियां हैं, जिन्हें चलाने वाला परिवार जनता के बीच तो ये कहतें हैं कि पूरा देश उनका परिवार है, लेकिन अन्दर ही अन्दर ये पार्टियां इस सिद्धांत पर काम करती हैं कि पूरा देश ही इनके परिवार का है. यानी दिखाया जाता है कि पूरे देश इनका परिवार है लेकिन असल में ये मानते ये हैं कि पूरा देश इनके परिवार का है.