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किसानों को माननी ही होगी SC की बात, केंद्र को भी झटका, जानिए कोर्ट में क्या-क्या हुआ

सुप्रीम कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को देखने के लिए 4 सदस्यों की कमेटी गठित कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के साथ ही अगले आदेश तक तीनों कृषि कानून लागू नहीं होंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून लागू करने पर रोक लगा दी है (फोटो- पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून लागू करने पर रोक लगा दी है (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान आंदोलन पर SC में लंबी बहस
  • SC ने कृषि कानून को लागू करने से रोका
  • 4 सदस्यों की कमेटी गठित

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को देखने के लिए 4 सदस्यों की कमेटी गठित कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के साथ ही अगले आदेश तक तीनों कृषि कानून लागू नहीं होंगे. इस कमेटी में जो 4 लोग हैं वो हैं, भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी (कृषि विशेषज्ञ), अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ) और अनिल घनावंत (शेतकारी संगठन). 

किसानों को डर है जमीन बिक जाएगी

मंगलवार को दोपहर 12.30 बजे सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की शुरुआत हुई. सबसे पहले याचिकाकर्ता एमएल शर्मा ने कहा कि किसानों को ये डर है कि उनकी जमीनें बेच दी जाएगी. किसान अभी भी तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं. 

किसी की जमीन नहीं बिकेगी-CJI

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि कौन कह रहा है कि जमीनें बेच दी जाएगी. इसके जवाब में एमएल शर्मा ने कहा कि अगर एक बार किसान कॉरपोरेट हाउस से समझौता करता है तो उसे शर्तों के मुताबिक उत्पाद पैदा करना होगा, नहीं तो उसे हर्जाना देना होगा.  एमएल शर्मा ने कहा कि किसान कमेटी के सामने पेश नहीं होना चाहते हैं. 

चीफ जस्टिस ने कहा कि ये किसने कहा कि जमीन बिक जाएगी, किसी भी किसान की जमीन नहीं बिकेगी. हम समस्या का समाधान चाहते हैं. सीजेआई ने कहा कि हमारे पास निहित अधिकारों के तहत हम कानून को सस्पेंड भी कर सकते हैं. CJI ने कहा कमिटी हम अपने लिए बना रहे है. किसी को खुश करने के लिए नहीं बना रहे हैं. कमिटी हमें रिपोर्ट देगी. कमिटी के समक्ष कोई भी जा सकता है. 

ये कोई राजनीति नहीं है-SC

CJI ने किसानों की ओर से पेश वकील को कहा कि आप कोर्ट को सपोर्ट करें. कोर्ट ने कहा कि ये कोई राजनीति नही है. हम समस्या का समाधान चाहते है. हम जमीनी हकीकत जानने के लिए कमिटी का गठन चाहते हैं. 

CJI ने कहा कि सोमवार को किसानों के वकील दुष्यंत दवे ने साफ साफ कहा कि किसान 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली नही निकालेंगे. अगर किसान सरकार के समक्ष जा सकते हैं तो कमिटी के समक्ष क्यों नहीं जा सकते?

कमिटी के सामने पेश न होने की बात पर फटकार

मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े ने कहा कि अगर किसान समस्या का समाधान चाहते है तो हम ये नही सुनना चाहते हैं कि किसान कमिटी के समक्ष पेश नहीं होंगे. 

PM मोदी किसानों से मिलने नहीं आए

इस पर वकील एम एल शर्मा ने कहा कि पीएम मोदी अब तक किसानों से बात करने आगे नहीं आए. इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कृषिमंत्री और सरकार के अन्य सीनियर मंत्री किसानों से आठ दौर की बातचीत में शामिल हो चुके हैं. 

कमेटी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा-SC

CJI ने AG से कहा कि कमिटी इस मामले में ज्यूडिशियल केस का हिस्सा होगी. CJI ने कहा कि अगर बिना किसी हल के आपको सिर्फ प्रदर्शन करना है तो आप अनिश्चितकाल तक प्रदर्शन करते रहिए उससे हल नही निकलेगा. हम हल निकालने के लिए ही कमेटी बनाना चाहते हैं. हम कमेटी बनाने जा रहे हैं. कमेटी इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहेगी. 

सशर्त कानून को सस्पेंड करना चाहते हैं-SC

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि हम कानून को सस्पेंड करना चाहते हैं लेकिन ये सशर्त होगी. 

सुनवाई के दौरान किसान संगठन (भानु) के वकील ए पी सिंह ने कहा कि किसानों को कॉन्फिडेंस में लेना होगा. उन्होंने कहा कि आपका सोमवार का संदेश हमने अपने मुवक्किल संगठनों को पहुंचा दिया है. उन्होंने कहा है कि बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे चिल्ला सहित यूपी बॉर्डर पर हो रहे प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे. अब तक धरने प्रदर्शन में 65 किसान की मृत्यु हो चुकी है. 

CJI ने कहा हम आपकी बात को रिकॉर्ड पर रख रहे हैं जिसमें आप कह रहे है कि धरने में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल नही होंगे. 

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि ये सुनिश्चित होना चाहिए कि 26 जनवरी को कुछ नहीं होगा. साल्वे ने कहा कि सिख फ़ॉर जस्टिस का प्रदर्शन में शामिल होना चिंता की बात है क्योंकि ये संगठन खालिस्तान की मांग करता है. 

इस बीच याचिकाकर्ता विकास सिंह ने कहा कि प्रदर्शन में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नही हो रहा है, प्रदर्शनकारियों को एक बड़ा इलाका दिया जाए ताकि वो विजिबल हो. इसके लिए रामलीला मैदान का नाम सुझाया गया. 

CJI ने पूछा क्या किसी संगठन ने दिल्ली के राम लीला मैदान में प्रदर्शन की इजाजत मांगी थी? विकास सिंह ने कहा कि पुलिस ने उन्हें दिल्ली में आने की इजाजत नही दी. CJI ने कहा कि हमें नहीं पता लेकिन प्रदर्शन के लिए पहले अर्जी देनी होती है और फिर पुलिस नियम और शर्तें लगाकर इसकी इजाजत देती है. 

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम अपने आदेश में यह लिख सकते हैं कि किसी किसान की जमीन नहीं ली जाएगी. 

आंदोलन में देश विरोधी संगठन के लोग


सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील नरसिम्हन ने कहा कि एक प्रतिबंधित संगठन भी इस आंदोलन को समर्थन कर रहा है. इस पर कोर्ट ने AG से पूछा क्या आप इसके बारे में जानते हैं?

AG ने कहा कि मेरी जानकारी के मुताबिक एक प्रतिबंधित संगठन है जो आंदोलनकारियों को भटकाने में  मदद कर रहा है. करनाल में जो घटना हुई ये उसी का एक उदाहरण है. 

केंद्र को हलफनामा दायर करने का निर्देश

इस पर CJI ने AG को कहा कि प्रतिबंधित संगठन को लेकर आप हलफनामा दायर करें.  पूरी जानकारी हमें चाहिए. 
हम पहले दिन से कह रहे है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है, वो करेगें. इसमें हमारा कोई दखल नहीं होगा. 

ट्रैक्टर रैली पर किसान संगठनों को निर्देश

26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली को लेकर दाखिल केंद्र सरकार के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस जारी किया. 

कमेटी के लिए एपी सिंह की ओर से जस्टिस काटजू, जस्टिस कोरियन का नाम सुझाने पर CJI ने कहा कि हम अपने हिसाब से कमिटी का गठन करेंगे. कमिटी में कौन होगा. कौन नही होगा ये अब हम तय करेंगे. सीजेआई ने कहा कि हम इस बारे में सभी की राय को संतुष्ट या खुश करने के लिए समिति का गठन नहीं कर रहे हैं. हम अपने उद्देश्य के लिए समिति का गठन कर रहे हैं.


इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित करने हुए तीनों कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी और चार सदस्यों की कमेटी गठित कर दी.

 

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