संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है. सत्तापक्ष और विपक्ष की रणनीति को देखते हुए संसद का सत्र हंगामेदार रहने वाला है. जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन चल रहा है. मॉनसून सत्र के लिए पहुंचे पीएम मोदी ने संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए युवाओं को संदेश दिया तो साथ ही बिना किसी का नाम लिए 56 साल के युवा पर तंज कसा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये सत्र काफी ऐतिहासिक है. इस सत्र में सरकार कई अहम बिल लाने वाली हैं. साथ ही पीएम ने विपक्षी दलों से सकारात्मक रवैए अपनाने और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप चलाने की अपील की.
पीएम मोदी ने कहा कि मानसून हो या और मानसून सत्र, अगर दोनों ही प्रो एक्टिव हो, तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं. जब दोनों प्रोडक्टिव होते हैं, तो देश का कल्याण होता है, जीव मात्र का कल्याण होता है. इसलिए हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून भी प्रोएक्टिव रहे और मानसून सत्र भी प्रोडक्टिव रहे.'
पीएम मोदी ने युवाओं को दिया संदेश
मॉनसून सत्र से शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं. देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है. चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी हो, एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं. पिछले साल मॉनसून सत्र से ठीक पहले, एक भारतीय नागरिक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर थे. दो दिन पहले, भारत के युवाओं के नेतृत्व वाले एक स्टार्ट-अप ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जिसे अब तक बहुत कम देश ही हासिल कर पाए हैं.
पीएम ने कहा कि ये संयोग नहीं, बल्कि एक संदेश है और बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम हैं. उन्होंने भारतीयों में आत्मविश्वास जगाया और दुनिया में भारत का मान बढ़ाया. ये संदेश देता है कि हमारे युवाओं की क्षमताएं और महत्वाकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह ही असीम हैं. 'शोर-शराबे की जरूरत नहीं' मेरा मानना है कि जहां तर्क, तथ्य होते हैं, वहां शोर-शराबे की कोई जरूरत नहीं होती. तर्क और तथ्य होते हैं तो शांत रहकर भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है.
पीएम ने 56 साल के युवा कहकर कसा तंज
प्रधानमंत्री ने युवाओं का जिक्र करके सियासी संदेश देते हुए नजर आए. उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं की क्षमताएं और महत्वाकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह ही असीम हैं, लेकिन साथ ही बिना किसी का नाम लिए 56 साल के युवा की बात कर तंज कसते नजर आए. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में नई उड़ान भरी है.
उन्होंने कहा कि यह जो स्टार्टअप शुरू हुए हैं, उसमें जो नौजवान काम कर रहे थे, मुझे बताया गया कि उनकी पूरी टीम की एवरेज एज सिर्फ 28 साल है. ऐसे नवजवानों ने यह काम किया है मैं किसी 56 की उम्र वाले नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं. युवाओं के स्टार्टअप की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने किस 56 साल के नेता की तरफ इशारा किया है.
बता दें कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को हुआ था और इस हिसाब से वह 56 साल के हैं. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या राहुल गांधी की तरफ करते हुए तंज भी कसा. पीएम मोदी कहा कि मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं.
पीएम मोदी ने बताया कैसे भारत हो रहा मजबूत
पीएम मोदी ने कहा कि हम अच्छी तरह जानते हैं और पूरी दुनिया को अलग-अलग इलाकों में लगातार बने हुए युद्ध के खतरे की चिंता है. वेस्ट एशिया में चल रहे युद्ध से भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया, जो ऊर्जा के लिए दूसरों पर निर्भर हैं. पेट्रोल, डीजल, एलपीजी सिलेंडर, फर्टिलाइजर और केमिकल को लेकर कई रुकावटें और संकट पैदा हुए. इसके बावजूद, भारत ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा. यह भारत की अंदरूनी ताकत को दिखाता है और उस जोश और उत्साह की झलक देता है.
पीएम ने अपने संबोधन में कहा, 'पिछले दिनों राजस्थान में बहुत बड़ी ऑयल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई है. कुछ हफ्ते पहले देश का तीसरा सेमीकंडक्टर प्लांट देश को समर्पित किया गया. अभी कुछ दिन पहले ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन देश को समर्पित की गई है. विश्व के बहुत कम देश ऐसे हैं, जिसके पास ये सुविधा है, लेकिन भारत ने जो हाइड्रोजन ट्रेन देशवासियों को समर्पित की है, वो सबसे ताकतवर इंजन वाली और सबसे लंबी है.'
पीएम मोदी ने विपक्ष से चर्चा की अपील की
प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से अपील करते हुए कहा, संसद में सार्थक चर्चा हो. मिलजुलकर देश को आगे ले जाने का संकल्प करें. यह समय की मांग है. उन्होंने कहा कि राष्ट्र निष्ठा से भरे राष्ट्रभक्ति की आवाज को सदन में उचित मंच मिलता रहे. इसलिए मैं आशा करता हूं कि और विश्वास भी है कि जहां तर्क होते हैं. वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती. अगर तर्क मजबूत है और तथ्य मजबूत है तो शांतचित्त से भी आवाज को बुलंद किया जा सकता है. मैं आशा करता हूं कि तथ्य और तर्क केसाथ संसद को समृद्ध किया जाए. हर आवाज को सम्मान मिले. यही मेरी आशा है.