केरल में वी. डी. सतीशन और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है.पार्टी ने देशभर के अपने शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्रियों को एक मंच पर लाकर एकजुटता और संगठनात्मक ताकत दिखाया है. लेकिन इस आयोजन में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही है.
कांग्रेस ने शपथ ग्रहण समारोह में अपने बड़े नेताओं की मौजूदगी के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और संगठित है. समारोह में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डी. के. शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मौजूद रहे. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा प्रमुखता से नजर आए.
इन तस्वीरों ने कांग्रेस नेतृत्व की छवि को और मजबूत किया. समारोह में केरल की राजनीतिक परंपरा के मुताबिक विभिन्न दलों और विचारधाराओं से जुड़े नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था. इनमें राजीव चंद्रशेखर, बिनॉय विश्वम और एन. के. प्रेमचंद्रन के अलावा कई सहयोगी और हितधारक शामिल रहे. हालांकि, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की अनुपस्थिति खटकती रही.
विजय राहुल गांधी के नए सहयोगी हैं. हाल ही में तमिलनाडु में हुए शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राहुल गांधी और विजय की नजदीकियों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. कांग्रेस ने विजय को इस समारोह का निमंत्रण भेजा था. हालांकि, विजय के कार्यालय से यात्रा को लेकर कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली थी. ऐसे में सवाल उठा कि आखिर विजय ने इस समारोह से दूरी क्यों बनाई.
तमिलनाडु सरकार के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी कारणों की वजह से विजय की यात्रा शुरू से ही तय नहीं थी. सूत्रों के मुताबिक, केरल में विजय की लोकप्रियता बेहद ज्यादा है और उनके कार्यक्रम में शामिल होने से भीड़ को संभालना मुश्किल हो सकता था. उनकी मौजूदगी की वजह से शपथ ग्रहण से लोगों का ध्यान हट सकता था.
जब कांग्रेस ने केरल में अपने मुख्यमंत्री पद के चेहरे को अंतिम रूप दिया, तभी से यह माना जा रहा था कि शपथ ग्रहण समारोह बड़ा राजनीतिक आयोजन बनने वाला है. उम्मीद की जा रही थी कि तमिलनाडु में राहुल गांधी और विजय के बीच दिखे वायरल पल जैसा दृश्य यहां भी देखने को मिलेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सूत्रों ने बताया कि विजय प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यस्त थे.
कई मंत्रियों ने अभी तक औपचारिक रूप से कार्यभार नहीं संभाला था. उनके कई तय कार्यक्रम भी थे, जिन्हें टालना संभव नहीं था. हालांकि, सियासी हलकों में ये भी चर्चा है कि यह सिर्फ व्यवस्थागत मामला नहीं बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि विजय शामिल होते, तो राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक संदेश जा सकता था.
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के साथ उनकी मौजूदगी गांधी परिवार के प्रति खुला राजनीतिक समर्थन भी माना जा सकता था. लेकिन शायद विजय कांग्रेस के साथ जरूरत से ज्यादा नजदीकी दिखाकर केंद्र सरकार को नाराज नहीं करना चाहते थे. उन्होंने हाल ही में अपना कार्यकाल शुरू किया है, इसलिए वे फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक संतुलन दिखाना चाहते थे.
विजय की लोकप्रियता लंबे समय से तमिलनाडु से बाहर भी दिखाई देती रही है. केरल में उनका बड़ा फैन बेस माना जाता है. उनकी फिल्मों को केरल में बिना डबिंग के भी जबरदस्त प्रतिक्रिया मिलती रही है. अब उनके राजनीतिक कदमों पर भी वहां बारीकी से नजर रखी जा रही है. उनकी पार्टी TVK ने हाल के दिनों में केरल में अपने संगठनात्मक विस्तार को तेज कर दिया है.
वायनाड और पलक्कड़ के बाद पार्टी ने अब त्रिशूर में भी जिला इकाई का गठन कर लिया है. त्रिशूर में हुए कार्यक्रम में विजय समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिली. शुरुआती चरण में विजय फैंस एसोसिएशन के सदस्यों को पार्टी में शामिल किया जा रहा है. तमिलगा वेट्री कजगम की योजना वार्ड स्तर पर समितियां बनाकर जमीनी नेटवर्क तैयार करने की है.
TVK के तमिलनाडु से बाहर विस्तार की कोशिशों पर अब कांग्रेस और BJP दोनों की नजर है. खासकर 2029 लोकसभा चुनावों को देखते हुए विजय की राजनीतिक सक्रियता और उनके हर कदम को गंभीरता से देखा जा रहा है. केरल के इस शपथ ग्रहण समारोह से विजय की गैरमौजूदगी के भले ही दूसरे कारण बताए जा रहे हों, लेकिनराजनीतिक हलकों में अलग संदेश है.