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केरल विधानसभा ने पास किया 'एंटी फार्मर लॉ रेजोल्यूशन', BJP विधायक ने भी दिया समर्थन

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा पारित किसान कानूनों के खिलाफ एक रेजोल्यूशन रखा जिसे पूरी केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से पास कर दिया है. इस रेजोल्यूशन को केरल विधानसभा में भाजपा के एकमात्र विधायक ने भी अपना समर्थन दिया है.

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केरल विधानसभा में एंटी फार्मर लॉ रेजोल्यूशन पास किया गया है
केरल विधानसभा में एंटी फार्मर लॉ रेजोल्यूशन पास किया गया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केरल में भाजपा के एकमात्र विधायक हैं ओ राजगोपाल
  • 'सर्वसम्मति के साथ जाना जरूरी'
  • केरल विधानसभा ने केंद्र के किसान कानूनों का विरोध किया है

केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी जहां कृषि कानूनों को किसानों के फायदे में बता रही है, वहीं केरल में भाजपा विधायक ने इन कानूनों के विरोध में आए प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया है. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा पारित किसान कानूनों के खिलाफ एक रेजोल्यूशन रखा. जिसे पूरी केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से पास कर दिया है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि इस रेजोल्यूशन को भाजपा विधायक ने भी अपना समर्थन दिया है. भाजपा विधायक ओ. राजगोपाल ने केंद्र की भाजपा सरकार के कानून के खिलाफ लाए गए इस रेजोल्यूशन को अपना समर्थन दिया है. जिसके बाद केरल की राजनीति में चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

हालांकि इस बीच विधानसभा में होने वाली चर्चा में ओ राजगोपाल ने रेजोल्यूशन के कुछ बिन्दुओं पर अपनी आपत्ति भी जताई है. ओ राजगोपाल ने कहा '"ये कानून किसानों के लाभ और संरक्षण के लिए हैं ताकि बीच के बिचोलियों और कमीशनखोरों को बाहर किया जा सके. ये कानून किसानों को अपनी उपज कहीं भी बेचने का अधिकार देते हैं. इन कानूनों का विरोध करने वाले लोग किसानों के हित के खिलाफ हैं. पहले इन्हीं कानूनों का समर्थन कांग्रेस और सीपीआई (एम) द्वारा किया गया था.''

लेकिन जब रेजोल्यूशन पर वोट की बात आई तो राजगोपाल ने कोई भी ऑब्जेक्शन नहीं किया बल्कि इस रेजोल्यूशन को सर्वसम्मति से पास हो जाने दिया. सत्र के समापन के बाद, राजगोपाल ने मीडिया से मुलाकात की और कहा कि वे इस रेजोल्यूशन का समर्थन करते हैं. राजगोपाल ने मीडिया से कहा "मैंने रेजोल्यूशन का विरोध नहीं किया क्योंकि लोगों को इन रायों के बीच एकाध मतभेदों को जानने की आवश्यकता नहीं है. आम सहमति यह है कि हम सभी को एक होना चाहिए. मैं इस स्टैंड को स्वीकार करता हूं, ये मेरी राय में लोकतांत्रिक भावना है,"

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जब राजगोपाल से पूछा गया कि क्या यही पार्टी का भी स्टैंड है, तब उन्होंने कहा कि ये हो सकता है कि पार्टी का स्टैंड नहीं है. 'इस प्रकार के कुछ समझौते लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं. हमें किसी बात पर अटल नहीं होना चाहिए. हमें सर्वसम्मति के साथ चलना चाहिए. उस आम सहमती के सामने मैंने अपने अपने विचार रखे. मैं इस रेजोल्यूशन के समर्थन में हूं. हमें कुछ मतभेद भी थे जिन्हें सामने रखा भी गया. मैंने वे बातें कहीं भी जहां मतभेद थे. लेकिन मैं रेजोल्यूशन के 'सार' से सहमत हूं.

आपको बता दें कि ओ राजगोपाल केरल विधानसभा में भाजपा के पहले और एकमात्र विधायक हैं. इसके अलावा वे पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से भी एक हैं. वे वाजपेयी सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहे हैं. राजगोपाल के इस कदम के बाद भाजपा नेता असमंजस में पड़ गए हैं कि इसकी व्याख्या किस तरह करें.

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