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भारत जोड़ो या वोट जोड़ो....इन 12 राज्यों से निकलेगी कांग्रेस की यात्रा, सेट होगा 321 सीटों पर मूड

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पार्टी के लिए वोट जोड़ो यात्रा भी साबित हो सकती है. जिन 12 राज्यों से ये यात्रा निकाली जा रही है, उनके जरिए सीधे-सीधे 321 लोकसभा सीटों पर समीकरण साधने की तैयारी है. 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने इन 321 में से सिर्फ 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

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कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा (पीटीआई) कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा (पीटीआई)
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2024 का लोकसभा चुनाव और कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा. 12 राज्यों को कवर करने वाली ये यात्रा कहने को भारत जोड़ो है, लेकिन इसका एक मकसद 'वोट जोड़ो' भी दिखाई पड़ता है. एक तय रणनीति के तहत उन राज्यों से ये यात्रा निकलने वाली है जहां पर पिछले सालों में कांग्रेस का जनाधार गिरा है, उसकी सीटें कम हुई हैं. कहा जा रहा है कि कांग्रेस की ये यात्रा भी 321 लोकसभा सीटों पर मूड सेट करने वाली है.

321 सीटों पर यात्रा बदलेगी खेल

कन्याकुमारी से शुरू हुई ये पदयात्रा.. केरल के तीन शहरों तक जाएगी (तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, और नीलांबुर). इसके बाद कर्नाटक के मैसूर, बेल्लारी और रायचूर से होते हुए ये तेलंगाना के विकराबाद पहुंचेगी और फिर महाराष्ट्र के नांदेड़ और जलगांव से ये मध्य प्रदेश के इंदौर और फिर राजस्थान के कुछ ज़िलों में पहुंचेगी (कोटा, दौसा और अलवर) और आखिर में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से ये श्रीनगर तक जाएगी. और इस तरह इस पदयात्रा में कुल 12 राज्य कवर होंगे. ये वो 12 राज्य हैं, जहां लोकसभा की कुल 321 लोक सभा सीटें हैं. और 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इनमें से केवल 37 सीटों पर जीत मिली थी.

राहुल गांधी की दावेदारी के लिए अहम यात्रा

ऐसे में भारत जोड़ो के साथ-साथ वोट जोड़ने की भी पूरी तैयारी कर ली गई है. कितनी सफलता मिलती है, ये समय बताएगा, लेकिन राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का काम अभी से शुरू कर दिया गया है. अटकलें तो ऐसी भी लगाई जा रही हैं कि जिसकी अगुवाई में ये यात्रा चलने वाली है, 2024 में भी उन्हीं की अगुवाई में चुनाव लड़ा जा सकता है. इस समय भारत जोड़ो यात्रा का सबसे बड़ा चेहरा राहुल गांधी हैं, ऐसे में उन्हीं को चुनाव के वक्त भी आगे किया जा सकता है. कांग्रेस अध्यक्ष वाली रेस में भी उनका नाम अभी सबसे आगे चल रहा है.

सोनिया गांधी का भावुक खत

वैसे इस भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी एक बड़ा सियासी संदेश दिया. एक भावुक खत में उन्होंने सभी कांग्रेसियों को कहा कि ऐसे समय, जब कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' शुरू हो रही है. तब इलाज और मेडिकल जांच के कारण में आप लोगों के बीच व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हूं. इस असमर्थता के लिए मुझे खेद है. शानदार विरासत वाली हमारी महान पार्टी कांग्रेस के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है. मुझे विश्वास है कि इससे हमारे संगठन का कायाकल्प होगा. भारतीय राजनीति के लिए यह पल परिवर्तनकारी साबित होगा. मैं विशेष तौर पर अपने उन 120 सहयोगियों को बधाई देना चाहती हूं, जो लगभग 3600 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा को पूरा करेंगे. यात्रा कई राज्यों से गुजरेगी और इसमें हजारों नए लोग शामिल होंगे, उन्हें भी मेरी तरफ से शुभकामनाएं. वैचारिक और आत्मिक रूप से मैं हमेशा 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल रहूंगी. निश्चित ही मैं यात्रा को आगे बढ़ते हुए लाइव देखूंगी. तो आइए हम संकल्प लें, एकजुट हों और अपने कर्तव्यों पर दृण रहें. जय हिंद.

कन्याकुमारी से खास कनेक्शन

अब कांग्रेस की इस भारत जोड़ो यात्रा का राजनीतिक एंगल तो समझ लिया, लेकिन एक पहलू है जो काफी खास रहा है. कांग्रेस की तरफ से कन्याकुमारी से इस यात्रा को शुरू करने की दो खास वजह रही हैं. कांग्रेस और गांधी परिवार के इतिहास में श्रीपेरंबदुर नाम की ये जगह दो वजहों से अहम है. पहली वजह तो यही है कि..यहां चुनावी यात्रा के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. और दूसरी वजह ये है कि.. श्रीपेरुम्बुदुर की इसी घटना के बाद 1991 के लोक सभा चुनाव में लोगों का मूड बदल गया था. ऐसा कहा जाता है कि राजीव गांधी की हत्या के बाद देश के लोग कांग्रेस पार्टी की तरफ़ झुक गए थे और इसके बाद जिन भी राज्यों में वोटिंग हुई, वहां कांग्रेस की ज़बरदस्त जीत हुई थी.

आजतक ब्यूरो
 

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