केरल के वायनाड जिले के कल्लाडी में हुए भूस्खलन को लेकर राज्य सरकार के मंत्रियों ने बड़ा दावा किया है. सरकार का कहना है कि यह प्राकृतिक नहीं, बल्कि 'मानव निर्मित' भूस्खलन था. मंत्रियों के मुताबिक, टनल निर्माण के दौरान निकाली गई मिट्टी को वैज्ञानिक तरीके से नहीं हटाया गया, जिसकी वजह से भारी बारिश में मिट्टी खिसक गई और यह हादसा हो गया.
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में मंत्री टी. सिद्दीक ने कहा कि कल्लाडी टनल परियोजना स्थल पर खुदाई से निकली मिट्टी को बिना वैज्ञानिक तरीके से एक जगह जमा किया गया था. पिछले 24 घंटों में वायनाड में 256 मिमी बारिश हुई, जिसके बाद यह मिट्टी खिसक गई. उन्होंने कहा कि पहले भी इस तरीके पर चिंता जताई गई थी और प्रशासन ने मिट्टी हटाने तथा जरूरत पड़ने पर काम रोकने के निर्देश दिए थे, लेकिन इनका पालन नहीं किया गया.
मंत्री ने कहा कि सरकार अब यह जांच करेगी कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ. उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह खुदाई से निकली मिट्टी वायनाड टाउनशिप परियोजना में भी डंप की गई थी, जहां 2024 के भूस्खलन पीड़ितों के लिए मकान बनाए जा रहे हैं.
एक की मौत, सात घायल और सात लापता
मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, सात लोग घायल हुए हैं और सात अन्य अभी भी लापता हैं. घायलों का इलाज WIMS अस्पताल में चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है.
युद्धस्तर पर चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
मंत्री टी. सिद्दीक ने बताया कि मीनांगडी से एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच चुकी है, जबकि कोझिकोड से एक और टीम को भी वायनाड रवाना किया गया है. फायर एंड रेस्क्यू सर्विस की टीमें पहले से ही राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं. वायनाड के जिला कलेक्टर भी मौके पर पहुंच चुके हैं और केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष शेखर कुरियाकोस को रेस्क्यू अभियान का समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
निर्माण कंपनी पर उठे सवाल
मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी इस घटना को "मानव निर्मित आपदा" करार दिया. उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कंपनी जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार टनल से निकली मिट्टी समय रहते हटा देती, तो यह हादसा टाला जा सकता था. उन्होंने कहा कि वायनाड पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील इलाका है और यहां इस तरह की परियोजनाओं में विशेष सावधानी बरतना जरूरी था.
चेन्निथला ने निर्माण कंपनी से सवाल किया कि आखिर टनल से निकली भारी मात्रा में मिट्टी को समय पर क्यों नहीं हटाया गया. उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है.