सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 15 जून को एक रिट याचिका पर नोटिस जारी किया. इस याचिका में दीपक प्रकाश को बिना विधायक चुने बिहार का पंचायती राज मंत्री दोबारा बनाए जाने को चुनौती दी गई थी. सोशल एक्टिविस्ट राकेश कुमार सिंह की याचिका पर, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और भारत के चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है.
यानी पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के किसी भी सदन का सदस्य बने बगैर मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने का परीक्षण सुप्रीम कोर्ट के द्वारा किया जाएगा.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या वो अभी भी मंत्री पद पर हैं? याचिकाकर्ता ने बताया कि हां दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री हैं. उन्हें मंत्रिमंडल विस्तार के वक्त दोबारा अगले छह महीने के लिए मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. ये संवैधानिक व्यवस्था का मजाक है.
याचिका में क्या कहा गया है?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं और इसलिए राज्य सरकार के मंत्रालय में कोई पद नहीं संभाल सकते. इसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, कोई शख्स जो विधायक नहीं है, वह लगातार छह महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन इस दौरान उसे राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल करनी होगी. यह छूट सिर्फ एक बार मिलने वाला मौका है और सरकार बदलने पर इसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.