सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से आए अनुसूचित जाति के हिंदुओं की दुर्दशा पर संज्ञान लेते हुए उनके विस्थापन पर रोक लगा दी है. जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने यह आदेश मजनूं का टीला और सिग्नेचर ब्रिज के पास रहने वाले करीब ढाई सौ परिवारों के एक हजार से ज्यादा लोगों को बचाने के लिए दिया है.
कोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने इन लोगों को भारतीय नागरिकता दे दी है, तो उन्हें इज्जत के साथ रहने के लिए जगह भी दी जानी चाहिए.
केंद्र सरकार को इस मामले पर जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया है. तब तक इन परिवारों को विस्थापित करने की किसी भी सरकारी मुहिम या परियोजना पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी.
'गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार'
कोर्ट ने पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए लोगों की स्थिति पर चिंता जताई है. जस्टिस सुंदरेश की बेंच ने कहा कि नागरिकता मिलने के बावजूद इन लोगों पर विस्थापन का खतरा मंडराना गंभीर मुद्दा है. कोर्ट का मानना है कि नागरिक के रूप में उन्हें सम्मानजनक आवास मिलना चाहिए. सिग्नेचर ब्रिज के आस-पास अस्थायी रूप से रह रहे इन लोगों को बिना किसी ठोस योजना के हटाना उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा.
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एक हजार से ज्यादा लोगों को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मजनूं का टीला इलाके में रहने वाले परिवारों को बड़ी राहत मिली है. सरकार की विस्थापन परियोजना से करीब 1000 से ज्यादा लोग बेघर होने की कगार पर थे. अब अगले चार हफ्तों तक सरकार कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकेगी. इस दौरान केंद्र को यह बताना होगा कि इन नागरिकों के स्थायी पुनर्वास और आवास के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है.