NEET परीक्षा में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के अनशन के अनशन के 20वां दिन पूरे हो गए हैं.
लगातार गिरते स्वास्थ्य के बीच सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात एक बेहद भावुक और तीखा वीडियो संदेश जारी किया. उन्होंने बताया कि अनशन के कारण उनके शरीर का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है, लेकिन उनका हौसला और मानसिक हौसला अब भी डिगा नहीं है.
उन्होंने देश की जनता से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि अगर इस देश में प्याज की कीमतों पर सरकारें गिर सकती हैं, तो देश के करोड़ों बच्चों के भविष्य और शिक्षा के लिए राजनीतिक जवाबदेही क्यों तय नहीं हो सकती?
'फैट्स और मसल्स खत्म हो चुके हैं'
सोनम वांगचुक ने वीडियो संदेश में अपने स्वास्थ्य की स्थिति साझा करते हुए कहा, "जी हां, मैं अभी भी ज़िंदा हूं. मेरे शरीर का लगभग 20% हिस्सा चला गया है. शरीर के फैट्स के बाद अब मसल्स (मांसपेशियां) भी जा चुके हैं. इसके बाद अंदरूनी ऑर्गन जाएंगे और आखिर में दिमाग... लेकिन अभी वो नौबत नहीं आई है. आज 20वां दिन खत्म हो रहा है और मैं साबित कर सकता हूं कि मेरा दिमाग अभी भी बिल्कुल ठीक काम कर रहा है."
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प्याज आंदोलन का दिया हवाला, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
जब आंदोलनकारियों ने उनसे पूछा कि क्या इस आंदोलन से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा या कोई जवाबदेही तय होगी? तो वांगचुक ने इतिहास याद दिलाते हुए कहा, "मैं आपसे पूछता हूं, भारत की जनता को अपने बच्चों की जान और शिक्षा ज़्यादा प्यारी है या प्याज? भारत में जनता के आंदोलन की ताकत से तीन बार सरकारें गिरी हैं. 1980 में केंद्र सरकार गिरी, जबकि 1998 में दिल्ली और राजस्थान की सरकारें गिरीं. वो आंदोलन सिर्फ प्याज की कीमतों को लेकर था. यहां हम बच्चों के जीवन की बात कर रहे हैं, इस साल नीट गड़बड़ी के कारण 20 से ज़्यादा छात्र आत्महत्या कर चुके हैं. क्या इस पर भी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होगा?"
20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के लिए बड़ी अपील
'कलेक्टिव जस्टिस प्रोग्राम' (CJP) के बैनर तले पिछले 28 जून से अनशन पर बैठे वांगचुक ने देशवासियों से 20 जुलाई को होने वाले 'संसद चलो' मार्च में रिकॉर्ड संख्या में जुटने की अपील की. उन्होंने कहा, "20 जुलाई को मेरे साथ संसद की तरफ मार्च कीजिएगा. हमारी असली ताकत आपकी संख्या है. वरना मैं कौन होता हूं? मैं तो एक अकेला, भूखा और नाचीज़ इंसान हूं. आप लोग ही वह ताकत हैं जिसने प्याज के लिए सरकारों को गिराया है, हम तो सिर्फ छात्रों के लिए जवाबदेही मांग रहे हैं."
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