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'हां, मैं भारत का कृषि मंत्री शिवराज...',  लोकसभा में क्यों बोले शिवराज, उत्तेजित हुए धर्मेंद्र यादव

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरी रौ में आ गए. टीएमसी सांसद सौगत रॉय के प्रश्न का जवाब देते हुए शिवराज ने दावा किया कि किसानों की आय दोगुनी हुई है. इस दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव भी उत्तेजित हो गए और स्पीकर को उन्हें टोकना पड़ा.

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शिवराज से प्रश्न पूछ उत्तेजित हो गए सपा सांसद धर्मेंद्र यादव (Photo: Screengrab)
शिवराज से प्रश्न पूछ उत्तेजित हो गए सपा सांसद धर्मेंद्र यादव (Photo: Screengrab)

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रोफेसर सौगत रॉय ने किसानों की आय को लेकर सवाल किया. इस सवाल का जवाब देने खड़े हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हां, मैं भारत का कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि किसानों की आय दोगुनी हुई है. सिर्फ दोगुनी ही नहीं, कई किसानों की आय तीन गुनी भी हुई है. 

शिवराज ने कहा कि हम किसानों को छह रुपये की किसान सम्मान निधि भी दे रहे हैं, जो सीधे किसानों के खाते में जाती है. उन्होंने कहा कि हमारे मध्य प्रदेश में ही किसान अब  तीन-तीन फसलें उगाकर अधिक आय अर्जित कर रहे हैं. उन्होंने रेवाड़ी के किसान का नाम भी लिया और कहा कि इनका फोन नंबर भी बता दे रहा हूं. इस पर स्पीकर ने उन्हें टोका और कहा कि ये प्रश्नकाल है, संक्षिप्त में जवाब दीजिए.

स्पीकर ने मंत्री के बोलने के बीच में ही अगले सदस्य का नाम ले लिया प्रश्न के लिए. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी किसानों की आय को लेकर सवाल किया. धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मंत्री ने जवाब में कहा है कि 75 हजार किसानों की आय दोगुनी हुई है. उन्होंने पूछा कि सरकार ने 2014 के घोषणापत्र में वादा किया था कि हम स्वामीनाथन कमेटी की  सिफारिश लागू करेंगे.

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धर्मेंद्र यादव ने कहा कि स्पेसिफिक सवाल है, आप ये सिफारिशें लागू करेंगे या नहीं. स्पीकर ने जवाब देने के लिए कृषि मंत्री से कहा. इस प्रश्नक का जवाब देने के लिए शिवराज सिंह चौहान खड़े हुए. इस दौरान धर्मेंद्र यादव उत्तेजित हो गए और बोलना जारी रखा. स्पीकर ने कहा कि प्रश्नकाल में उत्तेजित नहीं हुआ जाता. स्पीकर ने मंत्री से भी कहा कि डिटेल में नहीं, संक्षेप में ही जवाब दिया जाता है.

शिवराज सिंह चौहान ने जवाब में कहा कि जब यूपीए की सरकार थी, इन्होंने कैबिनेट नोट लिखकर दिया कि स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू नहीं की जा सकती. उन्होंने सरकार की ओर से एमएसपी पर खरीद की जानकारी दी. और कहा कि फल और सब्जियों पर ये सोच भी नहीं सकते थे, हमने अंगूर भी खरीदे, मिर्च भी खरीदी. आलू-प्याज-टमाटर बड़े शहर में किसान बेचेगा, तो ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी सरकार देगी.

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