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'ईरान युद्ध में भारत शामिल नहीं होगा, लेकिन...', मिडिल ईस्ट संकट पर बोले शशि थरूर

मिडिल ईस्ट में युद्ध को लेकर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. शशि थरूर ने कहा कि भारत सैन्य रूप से इस संघर्ष में शामिल नहीं होगा, लेकिन इसके असर से आंखें नहीं मूंद सकता. खासकर खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं.

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शशि थरूर ने कहा कि सरकार कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रही है (फाइल फोटो- PTI)
शशि थरूर ने कहा कि सरकार कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रही है (फाइल फोटो- PTI)

मिडिल ईस्ट संकट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत इस युद्ध में शामिल नहीं होगा, लेकिन इस संघर्ष के देश और विदेशों में रहने वाले उसके नागरिकों पर गंभीर परिणाम जरूर हो रहे हैं.

हमारे सहयोगी चैनल इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में थरूर ने कहा कि भारत की प्राथमिकता जल्द से जल्द युद्धविराम के लिए दबाव बनाना होना चाहिए. थरूर ने कहा, 'तनाव कम करने और कूटनीति की मांग करना भारत के हित में है.'

उन्होंने कहा कि हालांकि भारत के सैन्य रूप से संघर्ष में शामिल होने की संभावना नहीं है, लेकिन इसके परिणाम पहले से ही महसूस किए जा रहे हैं, खासकर खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले भारतीय नागरिकों द्वारा. उन्होंने हवाई अड्डों पर ऊपर से दागे जा रहे मिसाइलों के कारण फंसे लोगों और युद्ध के प्रकोप से प्रभावित व्यापारियों की दुर्दशा पर चर्चा की.

थरूर ने कहा, 'हमारा देश के करीब 90 लाख नागरिक खाड़ी देशों में रहते हैं. हमारे लिए, यह एक ऐसा मुद्दा है जो वास्तव में उनके जीवन और उनकी तरक्की करने की क्षमता, घर पैसे भेजने की क्षमता आदि को प्रभावित करता है. इसलिए हम मूकदर्शक नहीं रह सकते.'

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अमेरिकी तेल छूट पर थरूर क्या बोले

विपक्षी दलों ने रूसी तेल खरीद में मिली छूट को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की है. सवाल उठाया है कि क्या इससे भारत की संप्रभुता कमजोर नहीं होती है. जब थरूर से पूछा गया कि क्या नई दिल्ली को वाशिंगटन को कड़ा संदेश देना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि सरकार कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रही है.

कांग्रेस सांसद ने कहा कि इस छूट से भारतीय रिफाइनरों को प्रतिबंधों का खतरा उठाए बिना काफी राहत मिलेगी. उन्होंने कहा, 'उस छूट के साथ, वे उन 30 दिनों के दौरान खुलकर खरीदारी कर सकते हैं, यह जानते हुए कि उन खरीदों पर उनकी कंपनियों के लिए कोई नकारात्मक परिणाम नहीं होंगे.'

'सरकार के फैसलों का सम्मान करें'

जब थरूर से पूछा गया कि क्या भारत को इस संघर्ष पर सैद्धांतिक रुख अपनाना चाहिए या अस्थिर स्वभाव वाले ट्रंप को नाराज न करने का विकल्प चुनना चाहिए, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आपको वास्तव में सरकार द्वारा चुने गए विकल्पों का सम्मान करना होगा, क्योंकि वे उस समय भारत के सर्वोत्तम हित में हैं, यह देखते हुए कि अन्य विकल्पों के परिणाम होंगे.'

एक अनुभवी राजनयिक, थरूर ने कहा कि नई दिल्ली ने इस नाजुक समय में सावधानीपूर्वक संतुलन बनाने की कोशिश की है.

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