scorecardresearch
 

138 साल पहले विदेश से लौटे डॉ राधा गोबिंद कर ने रखी थी RG Kar अस्पताल की बुनियाद

कोलकाता के हेल्थकेयर सिस्टम में आरजी कर मेडिकल कॉलेज का बहुत महत्व है. इसकी स्थापना 1886 में हुई थी. यह एशिया का पहला गैर सरकारी मेडिकल कॉलेज था, जिसने पश्चिम बंगाल और देशभर में हेल्थकेयर सिस्टम की रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी. इसकी स्थापना डॉ. राधा गोबिंद कर ने की थी.

Advertisement
X
डॉ. राधा गोबिंद कर
डॉ. राधा गोबिंद कर

कोलकाता में एक ट्रेनी डॉक्टर के रेप और मर्डर मामले से देशभर के लोगों में गुस्सा है. इस मामले में आरोपी सीबीआई की गिरफ्त में है. कोर्ट से उसके पॉलीग्राफ टेस्ट की मंजूरी मिल चुकी है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है कोलकाता का RG Kar मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल. 

इस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का कोलकाता के हेल्थकेयर सिस्टम में बहुत महत्व है. इसकी स्थापना 1886 में हुई थी. यह एशिया का पहला गैर सरकारी मेडिकल कॉलेज था, जिसने पश्चिम बंगाल और देशभर में हेल्थकेयर सिस्टम की आधारशिला रखी थी. इसकी स्थापना डॉ. राधा गोबिंद कर ने की थी, जो इस मेडिकल कॉलेज के पहले सचिव भी थे और 1918 में निधन तक इसी पद पर रहे थे.

पश्चिम बंगाल सरकार ने 12 मई 1958 को इस मेडिकल कॉलेज को अपने अधीन ले लिया था. यह पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से संबद्ध और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त है. यहां से पोस्ट डॉक्टरेट (DM/MCH), पीजी डिप्लोमा और फेलोशिप प्रोग्राम के अलावा अंडरग्रेजुएट (एमबीबीएस) और पोस्ट ग्रेजुएट (एमएस/एमडी) मेडिकल एजुकेशन की पढ़ाई होती है.

कौन थे आरजी कर?

राधा गोबिंद कर एक दूरदर्शी समाज सुधारक थे, जिन्होंने कलकत्ता के बैठकखाना बाजार रोड में एक किराए के घर से मेडिकल कॉलेज शुरू किया था. उनका जन्म 1852 में ब्रिटिश शानसकाल के दौरान हुआ था. उनके पिता एक चिकित्सक थे. राधा गोबिंद कर ने बंगाल मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई की. बंगाल मेडिकल कॉलेज उस समय एशिया का सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज था. उसे बाद में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना गया. वह ग्रेजुएशन के बाद आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए और मेडिकल की डिग्री लेकर 1886 में भारत लौटे.

Advertisement

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत लौटने पर उन्हें महसूस हुआ कि देश का औपनिवेशिक कल्चर बड़े पैमाने पर लोगों के लिए बाधा है, जिसकी वजह से उन्हें छात्र और मरीज के रूप में मौजूदा मेडिकल स्कूलों का लाभ नहीं मिल पा रहा है. 

इस वजह से उन्हें एक नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना का विचार आया और इस तरह 1886 में कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन की स्थापना की गई. यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में 2011 में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज का पहला मेडिकल कोर्स तीन साल का था और मेडिकल की पढ़ाई बंगाली भाषा में कराई जाती थी. 

आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कैसे पड़ा नाम?

कलकत्ता के बैठक खाना रोड पर किराए पर ली गई बिल्डिंग बाद में बोउबाजार स्ट्रीट पर शिफ्ट हो गई. हालांकि, उस समय इसके नाम में अस्पताल नहीं लगा था. इस वजह से छात्रों को ट्रेनिंग के लिए हावड़ा के मायो हॉस्पिटल जाना पड़ता था.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेज की बिल्डिंग बनाने के लिए 1898 में बेलगाछिया में 12 हजार रुपये में चार एकड़ जमीन खरीदी गई. इसके चार साल बाद 1902 में उस समय के गवर्नर लॉर्ड वुडबर्न ने 30 बेड वाले, सिंगल स्टोरी अस्पताल का उद्घाटन किया, जिसका नाम ब्रिटेन के प्रिंस अल्बर्ट विक्टर के नाम पर रखा गया. इसके बाद अस्पताल की दो और मंजिलें तैयार की गईं. उस समय की बिल्डिंग आज भी जस की तस बनी हुई है.

Advertisement

कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स ऑफ बंगाल का 1904 में आरजी कर मेडिकल में विलय हुआ. इसके बाद कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन का नाम 1916 में बदलकर बेलगाछिया मेडिकल कॉलेज हो गया. लेकिन इसके दो साल बाद 1918 में कर का निधन हो गया. 

उनके निधन से पहले कॉलेज ने कई उपलब्धियां हासिल की. समय के साथ-साथ कॉलेज में नई सर्जिकल बिल्डिंग और एनाटॉमी ब्लॉक बना. एशिया का पहला मनोचिकित्सा ओपीडी भी यहीं खुला. इसके कैंपस में 1935 में सर केदारनाथ दास मैटरनिटी हॉस्पिटल बनाया गया. इसके साथ ही 1939 में कार्डियोलॉजी विभाग भी तैयार किया गया. 

1947 में देश को आजादी मिलने के बाद इस मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल की प्रसिद्धि बढ़ी. आजादी मिलने के कुछ महीने बाद 12 मई 1948 को इसका नाम संस्थापक डॉ. आरजी कर के नाम पर बदलकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कर दिया गया. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement