दिल्ली में बीते सप्ताह आयोजित हुए एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन का विवाद थमता सा नहीं दिख रहा है. कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने हिमाचल प्रदेश गई दिल्ली पुलिस के साथ स्थानीय पुलिस का टकराव सामने आया है. यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया और फिर तीनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर भेजा गया.
इस पूरे प्रकरण में जो सबसे ज्यादा नाम चर्चा में आया है वो है दिल्ली पुलिस के अधिकारी राहुल विक्रम का. राहुल विक्रम दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में बतौर असिस्टेंट कमीशंडर ऑफ पुलिस (एसीपी) तैनात हैं.
वह 2018 बैच के दानिप्स अधिकारी हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव के रहने वाले हैं. कई सालों से स्पेशल सेल में कार्यरत राहुल विक्रम का मुख्य फोकस काउंटर टेररिज्म और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर रहा है.
राहुल के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. झारखंड से जुड़े अलकायदा मॉड्यूल का खुलासा इसी टीम की बड़ी सफलता रही है. उनकी टीम ने न केवल देश के अलग-अलग हिस्सों में एक्टिव अपराधियों और आतंकवादी नेटवर्क पर कार्रवाई की, बल्कि विदेशों में छिपे वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने में भी अहम भूमिका निभाई है.
यह भी पढ़ें: 'शिमला पुलिस की कार्रवाई कानूनी रूप से जायज...', दिल्ली पुलिस से टकराव पर आया हिमाचल पुलिस का बयान
खासतौर से, सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मास्टरमाइंड सचिन थापन को विदेश से भारत लाने में उनकी टीम सक्रिय रही. हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टर काला राणा को, जो लारेंस बिश्नोई का करीबी माना जाता था, थाईलैंड से भारत लाने की कार्रवाई में भी उनकी टीम शामिल थी. इसके अलावा पंजाब के कई चर्चित गैंगस्टरों की गिरफ्तारी में भी उनकी टीम सहयोगी रही है.
गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी, जिस पर दिल्ली और हरियाणा पुलिस ने सात लाख रुपये का इनाम रखा था, को अनुराधा के साथ पकड़ना भी राहुल विक्रम की टीम का महत्वपूर्ण काम था.
राहुल विक्रम की सक्रिय भूमिका और नेतृत्व ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को काउंटर टेररिज्म और संगठित अपराध से लड़ने में एक मजबूत आधार प्रदान किया है.