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'न आजाद, न विवादित, PoK सिर्फ अवैध कब्जे का इलाका है!', रावलकोट में प्रदर्शनकारियों ने उड़ाई पाक नैरेटिव की धज्जियां

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में हुई जनसभा में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमान खान ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि यह इलाका आजाद नहीं बल्कि कब्जे वाला क्षेत्र है. उनके इस बयान को हजारों लोगों ने तालियों और नारों के साथ समर्थन दिया.

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रावलकोट की जनसभा में अमान खान ने शहबाज शरीफ सरकार पर हमला बोला है (Photo: ITG)
रावलकोट की जनसभा में अमान खान ने शहबाज शरीफ सरकार पर हमला बोला है (Photo: ITG)

रावलकोट में एक बड़ी जनसभा के दौरान संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेता सरदार अमान खान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह इलाका न तो आजाद है और न ही विवादित बल्कि इस पर अवैध कब्जा किया गया है. 

उनका यह बयान पाकिस्तान के आधिकारिक रुख से बिल्कुल अलग है जिसमें इस क्षेत्र को हमेशा आजाद कश्मीर कहा जाता रहा है. इस बयान के बाद जनसभा में मौजूद हजारों लोगों ने तालियों और नारों के साथ उनका समर्थन किया.

रावलकोट में हुई इस जनसभा में हजारों लोग जुटे. यह सभा उस आंदोलन के बीच हुई जो पिछले कई दिनों से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के अलग अलग हिस्सों में चल रहा है. इस आंदोलन में लोग बिजली की समस्या, बढ़ती महंगाई, प्रशासनिक व्यवस्था और कई अन्य मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे हैं.

यह भी पढ़ें: PoK में पाकिस्तान के खिलाफ हल्ला बोल... मुजफ्फराबाद मार्च से सहमी शहबाज सरकार, बंदूकों के दम पर विद्रोह कुचल रहे मुनीर

इसी माहौल के बीच अमान खान ने मंच से लोगों को संबोधित किया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, यह कोई विवादित इलाका नहीं है, यह अवैध कब्जे वाला इलाका है, इस पर कब्जा किया गया है. उनके इस बयान को सुनकर वहां मौजूद भीड़ ने जोरदार तालियां बजाईं और नारेबाजी शुरू कर दी. लोगों का यह समर्थन दिखाता है कि इलाके में मौजूद कई लोग भी इसी तरह की भावना रखते हैं.

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गौरतलब है कि पाकिस्तान हमेशा से इस क्षेत्र को आजाद कश्मीर कहता आया है. लेकिन अमान खान का यह बयान उस पुराने नैरेटिव को सीधी चुनौती देता है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में लोगों का गुस्सा प्रशासनिक कमियों और आर्थिक समस्याओं को लेकर पहले से ही बढ़ा हुआ है.

अभी तक पाकिस्तान सरकार की तरफ से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का असर आंदोलन और इलाके की राजनीति पर किस तरह पड़ता है.

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