पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं. रावलकोट, मुजफ्फराबाद और कई अन्य इलाकों में बाजार बंद हैं, सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ है. इन प्रदर्शनों की अगुवाई संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है, जिसने सरकार के सामने 38 सूत्रीय 'चार्टर ऑफ डिमांड्स' रखा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इन मांगों को लागू नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा.
सबसे बड़ी मांग बिजली को लेकर है. प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि PoK में बनने वाली जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पादित बिजली स्थानीय उत्पादन लागत पर मिले. साथ ही मंगला बांध जैसी परियोजनाओं से मिलने वाली रॉयल्टी सीधे क्षेत्र को दी जाए. बिजली बिलों से अतिरिक्त टैक्स, फ्यूल एडजस्टमेंट और अन्य सरचार्ज खत्म करने और बिना सूचना होने वाली लोड शेडिंग पर रोक लगाने की भी मांग की गई है.
महंगाई को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी है. चार्टर में आटे की कीमत गिलगित-बाल्टिस्तान के बराबर करने, चीनी, घी और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं पर सरकारी सब्सिडी देने और किसानों को खाद और बीज पर विशेष सहायता देने की मांग शामिल है.
JAAC की राजनीतिक मांगें
राजनीतिक अधिकार भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा हैं. JAAC चाहता है कि विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें खत्म की जाएं, जिन्हें स्थानीय लोग इस्लामाबाद के राजनीतिक हस्तक्षेप का माध्यम मानते हैं. इसके अलावा स्थानीय निकायों को ज्यादा वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देने, क्षेत्रीय संगठनों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और संविधान में सत्ता के बंटवारे की नई व्यवस्था बनाने की मांग की गई है.
चार्टर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग है. प्रदर्शनकारी मंत्रियों की संख्या सीमित करने, अधिकारियों की लग्जरी सुविधाएं खत्म करने और पिछले दस वर्षों के सरकारी खर्च की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं.
एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं की मांग
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े सुधारों की मांग उठी है. जिला अस्पतालों में एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने, मुफ्त स्वास्थ्य कार्ड लागू करने, ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति करने और नए शिक्षा बोर्ड और तकनीकी संस्थान खोलने की मांग की गई है.
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पुलिस एक्शन के खिलाफ JAAC की डिमांड
प्रदर्शनकारियों ने इसके अलावा आंदोलनकारियों पर दर्ज आतंकवाद के मामलों को वापस लेने, गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई, पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच, बेहतर सड़कें, निर्बाध इंटरनेट सेवा, स्वच्छ पेयजल, स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता और पर्यटन से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा PoK में ही खर्च करने जैसी मांगें भी रखी हैं.
इन 38 मांगों को लेकर JAAC और पाकिस्तान सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी है. यही वजह है कि रावलकोट, मुजफ्फराबाद और आसपास के कई इलाकों में आंदोलन लगातार जारी है और पाकिस्तान सरकार पर इन मांगों को मानने का दबाव बढ़ता जा रहा है.