
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रिडरिक मर्ज ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों की जानकारी दी. इस महत्वपूर्ण बातचीत में दोनों नेताओं ने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में अपने संबंधों को और सशक्त बनाने पर बल दिया.
दोनों देशों ने रक्षा इंडस्ट्रियल सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त रूप से सहमति जताई है, जिसका उद्देश्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है. इसके अलावा, आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए भारत-जर्मनी आर्थिक और निवेश समिति के तहत एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंच की स्थापना भी घोषित की गई, जो द्विपक्षीय निवेश और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाने में मदद करेगा.
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में साझेदारी को लेकर भी दोनों देशों ने समझौता किया है, जिससे इस क्षेत्र में तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी नई योजनाओं के तहत एक इंडो-जर्मन रोडमैप पेश किया गया, जो शैक्षिक सहयोग को उत्साह बढ़ाएगा.

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स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों ने स्किल पार्टनरशिप की घोषणा की, जिससे हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की नैतिक और टिकाऊ भर्ती सुनिश्चित होगी. रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान में एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की गई.
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या-क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत और जर्मनी के बीच सेतु बनाया था. आज जर्मनी के चांसलर की यह एशिया की पहली यात्रा है, जो भारत के साथ गहरे और मजबूत संबंधों को दर्शाती है. स्नेह और आत्मीयता के साथ हम चांसलर का हार्दिक स्वागत करते हैं. यह दौरा हमारी साझा महत्वाकांक्षा और परस्पर भरोसे का प्रतीक है.
भारत और जर्मनी की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत सहयोग से पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण हैं. हमारी द्विपक्षीय व्यापारिक साझेदारी 50 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर से भी आगे बढ़ चुकी है. भारत में दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां निवेश कर भरोसा जता चुकी हैं. इसी कड़ी में भारत- जर्मनी एक्सलेंस सेंटर की स्थापना का निर्णय लिया गया है, जो वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा.
ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में नया प्रोजेक्ट गेम-चेंजर साबित होगा. आज हुए समझौतों (MoUs) से हमारे सहयोग को और मजबूती तथा गति मिलेगी. रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है और इससे नए व्यापार के रास्ते खुलेंगे.
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भारत और जर्मनी के बीच गहरे और लोगों का लोगों से जुड़ाव है. रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को गहराई से प्रभावित किया है. स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने पूरे यूरोप को प्रेरित किया और मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारतीय स्वतंत्रता का ध्वज फहराकर हमारी आज़ादी की आकांक्षा को वैश्विक मान्यता दी.
हमने यूक्रेन, गाजा सहित अनेक वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. भारत और जर्मनी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई जारी रखेंगे. वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार अत्यंत आवश्यक है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार के लिए G4 समूह के माध्यम से हमारा संयुक्त प्रयास प्रमुख है.