
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक साबरमती आश्रम का दौरा किया. यह आश्रम महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों का प्रतीक माना जाता है. दोनों नेताओं ने आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
दौरे के दौरान उन्होंने गांधीजी के निवास स्थल हृदय कुंज का भी अवलोकन किया, जहां चरखे जैसे आत्मनिर्भरता और सरल जीवन के प्रतीक को करीब से देखा. आश्रम में आयोजित प्रदर्शनों के माध्यम से गांधीजी के सत्य, अहिंसा और आत्मबल के संदेशों पर गहन चर्चा हुई.
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज साबरमती आश्रम की यात्रा से गहराई से प्रभावित नजर आए. उन्होंने अपनी विजिटर बुक में लिखा कि महात्मा गांधी की स्वतंत्रता की शक्ति और प्रत्येक व्यक्ति में मौजूद अटूट विश्वास आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने यह भी कहा कि गांधीजी की शिक्षाएं भारत और जर्मनी के बीच मित्रता को और मजबूत बनाती हैं.

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चांसलर मर्ज ने उल्लेख किया कि गांधीजी की शिक्षाएं आज विश्व में शांति, सहिष्णुता और आपसी सम्मान के लिए अत्यंत आवश्यक हैं. इस दौरे को भारत और जर्मनी के सांस्कृतिक और नैतिक संबंधों के आधार के रूप में देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर गांधीजी के विचारों की वैश्विक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दोनों देशों के साझा मूल्यों और मानवीय नजरिया का प्रतीक है. यह दौरा भारत-जर्मनी के गहरे और मजबूत संबंधों का संदेश देता है.
इससे पहले दोनों नेताओं ने इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में भाग लिया था. इस दौरान जर्मनी के चांसलर पतंग उड़ाते भी नजर आए.