स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप पिक्सेल के को-फाउंडर बेंगलुरु के बाहरी इलाके में सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए जमीन मिलने में आ रही भारी दिक्कतों से काफी परेशान हो गए. क्षितिज खंडेलवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जमीन मिलने का प्रोसेस खुद सैटेलाइट बनाने से भी कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हुआ है. इसके बाद तो हाई-टेक इन्वेस्टमेंट्स को लुभाने के लिए तीन राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच जैसे होड़ ही मच गई.
खंडेलवाल ने एक्स पर लिखा, बेंगलुरु के बाहरी इलाके में सैटेलाइट फ़ैक्टरी के लिए जमीन हासिल करने की कोशिश, असल में सैटेलाइट बनाने से कहीं ज़्यादा मुश्किल रही है. उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी हब में से एक में काम करने के बावजूद, इस एडवांस्ड टेक्नोलॉजी स्टार्टअप को इंडस्ट्रियल जमीन हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
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सबसे पहले कर्नाटक के लार्ज एंड मीडियम इंडस्ट्रीज और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट मंत्री ने इस पर तुरंत रिस्पॉन्स दिया. उन्होंने क्षितिज खंडेलवाल की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा, मेरा ऑफिस जल्द ही आपसे संपर्क करेगा, और स्टार्टअप को हर संभव सरकारी मदद का भरोसा दिया, जिसके बाद क्षितिज ने भी उनका आभार जताया.
वहीं इसके साथ ही पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश ने भी प्रस्तावित सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग सुविधा को अपने यहां लगाने का प्रस्ताव रखा.
आंध्र प्रदेश के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशंस मंत्री नारा लोकेश ने खंडेलवाल की पोस्ट का जवाब देते हुए इस प्रोजेक्ट के लिए अनंतपुर को एक बेहतरीन ऑप्शन के तौर पर पेश किया.
आंध्र प्रदेश के मंत्री ने आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड को निर्देश भी दिए कि वे पिक्सेल से संपर्क करें और राज्य में इन्वेस्टमेंट के मौकों को तलाशें.
जल्द ही, तमिलनाडु की इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी भी इस चर्चा में शामिल हो गई और होसुर को एक वैकल्पिक जगह के तौर पर पेश किया.
बता दें, पिक्सेल की शुरुआत 2019 में खंडेलवाल और अवैस अहमद ने की थी. तब से, यह भारत की प्रमुख प्राइवेट स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक बन गई है.