Mallikarjun Kharge and Kiren Rijiju संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हंगामा हो रहा है. मंगलवार को सत्र के तीसरे हफ्ते का दूसरा दिन है. इस दौरान चढ़ावा चोरी को लेकर दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ. लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई. राज्यसभा की कार्यवाही करीब आधे घंटे हंगामे के बाद 12 बजे तक स्थगित कर दी गई थी, इसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन हंगामा नहीं रुका तो कुछ मिनट बाद फिर से दो बजे तक स्थगित कर दी गई.
बता दें कि आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करसकती हैं. लोकसभा की संशोधित कार्यसूची के अनुसार यह विधेयक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है.
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संसद परिसर में प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने 'दान का पैसा कहां गया' जैसे नारे लगाए.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सालों तक भगवान राम और राम मंदिर का विरोध करती रही हैं. राम मंदिर बनने पर काली पट्टी बांधकर विरोध किया था. आज वही लोग घड़ियाली आंसू बहाकर देश को गुमराह नहीं कर सकते. पहले भगवान राम का अपमान करने के लिए देश से माफी मांगिए, उसके बाद सरकार से जवाब मांगिए.
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच जोरदार बहस हुई. खड़गे ने कहा- राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था. ट्रस्ट को 70 एकड़ से ज्यादा जमीन सौंपी. पीएम खुद राम मंदिर से जुड़े हर आयोजन में शामिल हुए. अब ED, CBI और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां कहां हैं. सरकार को सदन में इसका जवाब देना चाहिए.
संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष की ओर से इतना हंगामा हुआ कि लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया आज एनडीए संसदीय दल की बैठक में केंद्र सरकार की युवा एवं खेल क्षेत्र में उपलब्धियों पर प्रस्तुति दे रहे हैं. इसके साथ ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान रोजगार सृजन और रोजगार से जुड़ी प्रमुख पहलों पर भी सांसदों को विस्तृत जानकारी देंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन संसद पुस्तकालय भवन के जी.एम.सी. बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक 'मंगल मिलन' में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. इस बैठक में एनडीए के सांसदों भी शामिल हैं. बैठक में संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों तथा आगे की रणनीति पर चर्चा हो रही है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगी. लोकसभा की संशोधित कार्यसूची के अनुसार यह विधेयक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है.
वित्त मंत्री सदन से विधेयक पेश करने की अनुमति मांगेंगी और इसके बाद इसे औपचारिक रूप से पेश करेंगी. साथ ही वह आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 (संख्या-2, 2026) जारी करने की आवश्यकता और उसके कारणों से जुड़ा हिंदी और अंग्रेजी में स्पष्टीकरण भी सदन के पटल पर रखेंगी.
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, "13 स्वर्ण पदकों में से 7 स्वर्ण पदक अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते हैं. हमारी मांग है कि 2030 के राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) हरियाणा में आयोजित किए जाएं. यदि पूरा आयोजन हरियाणा में संभव नहीं है, तो कम से कम हरियाणा को सह-मेजबान (को-होस्ट) राज्य बनाया जाए.
उन्होंने कहा, "इन खेलों के आयोजन से बुनियादी ढांचे के विकास में लाखों करोड़ रुपये का निवेश होगा. 'खेलो इंडिया' योजना के तहत केंद्र सरकार ने सबसे अधिक बजट गुजरात को दिया, जबकि हरियाणा को सबसे कम बजट मिला."
दीपेंद्र हुड्डा ने आगे कहा, "अब तक हम सरकार से लगातार मांग करते रहे हैं कि यदि भारत को 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का अवसर मिलता है, तो हरियाणा को सह-मेजबान बनाया जाए. मेरा मानना है कि हम इस मांग को संसद सहित हर मंच पर मजबूती से उठाएंगे."
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में नए दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) पर चर्चा कराने की मांग को लेकर कार्यस्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion Notice) दिया है. तिवारी ने सदन की नियमित कार्यवाही स्थगित कर इस महत्वपूर्ण विषय पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की, ताकि प्रस्तावित नए दल-बदल विरोधी कानून के विभिन्न प्रावधानों, उसके राजनीतिक और संवैधानिक प्रभावों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा सके.