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कोई 50 दिन से कांवड़ यात्रा पर, तो कहीं बच्चों की टोली! कांवड़ यात्रा में दिखे अलग-अलग रंग

कांवड़ यात्रा के कई रंग देखने को मिल रहे हैं. आजतक की टीम ने कांवड़ लेकर जा रहे यात्रियों से बातचीत की. कोई 50 दिनों से कांवड़ यात्रा पर है, तो कहीं बच्चों की टोली देखने को मिली.

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कांवड़ यात्रा (Photo: ITG)
कांवड़ यात्रा (Photo: ITG)

देश भर में कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है. कांवड़ यात्रा के कई रंग देखने को मिल रहे हैं. कई यात्री तो अपनी आधी से ज्यादा दूरी खत्म भी कर चुके हैं. सफर में कई लोगों के शरीर पर चोटें आई लेकिन 'बम-बम भोले' के उद्घोष के साथ वे आगे बढ़ते जा रहे हैं. 

आजतक की टीम ने कांवड़ यात्रा के दौरान कई लोगों से बात की. फरीदाबाद के दो भाई लगभग 50 दिन से कांवड़ यात्रा में है. एक भाई ने 110 लीटर तो दूसरे ने 81 लीटर जल लिया है. खास बात तो ये है कि जो भाई 81 लीटर जल लेकर चल रहा है वह पहली बार जल ला रहा है. दोनों भाइयों ने 16 जून को अपनी कांवड़ यात्रा की शुरुआत की थी.

कांवड़ यात्रा में उम्र का भी कोई पैमाना नहीं है. अलग-अलग उम्र के लोग पूरे जोश और उत्साह के साथ कांवड़ लेकर जा रहे हैं. आजतक की टीम ने नन्हें बच्चों से भी बात की.

बच्चों की ये फौज भी हरिद्वार से जल लेकर अपने घर की तरफ रही है. 5 बच्चों की इस टोली में सबसे छोटी बच्ची 9 साल की है जो 4 साल की उम्र से पिता के साथ कांवड़ लेकर आ रही है. इस टोली के सबसे बड़े बच्चे की उम्र 13 साल है.

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लोगों ने अपनी कांवड़ को अलग-अलग तरीके से सजाया है. किसी ने फूलों से तो किसी ने अपनी कांवड़ को रंगी-बिरंगी रोशनी से सजाया है. एक कांवड़ पर प्रेमानंद महाराज की तस्वीर भी दिखी. ये नंदगांव के दो भाई हैं जो पहली बार कांवड़ लेकर आए हैं. उनका कहना है कि अगली बार प्रेमानंद महाराज को जल चढ़ाएंगे. इन भाइयों के नाम विष्णु और सचिन हैं. ये 41 लीटर जल लेकर आए हैं. इनकी कहानी बेहद रोचक है, दोनों भाइयों की उम्र 19-20 है. घरवालों ने इन्हें कांवड़ लेकर जाने से मना किया तो इन्होंने जि़द करके घरवालों को मनाया. घर से इन्हें सिर्फ 11 लीटर जल लाने की अनुमति मिली थी लेकिन ये दोनों भाई 41 लीटर जल लेकर जा रहे हैं. इनका कहना है कि नंदगांव के उस शिव मंदिर में ये जल चढ़ाएंगे जहां कृष्ण के दर्शन न मिलने पर महादेव ने तप किया था.


 

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