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तिहाड़ जेल की बैरक नंबर 7 में कटेगी Yasin Malik की रात, कोर्ट ने सुनाई है उम्रकैद की सजा

Yasin Malik: कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले यासीन मलिक को ताउम्र कैद की सजा सुनाई गई है. हालांकि, NIA ने यासीन मलिक के लिए फांसी की मांग की थी, लेकिन दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई.

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यासीन मलिक (File Photo)
यासीन मलिक (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टेरर फंडिंग केस में दोषी पाया गया यासीन मलिक
  • यासीन मलिक ने टेरर फंडिंग के आरोपों को किया कबूल

प्रतिबंधित संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चीफ यासीन मलिक को टेरर फंडिंग के 2 मामलों में बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. मलिक पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया. उसे तिहाड़ जेल के बैरक 7 में रखा गया है. सजा का ऐलान होते ही दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर जमा लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए मिठाइयां बांटीं.

तिहाड़ प्रशासन के मुखिया ने यासीन मलिक की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं. यासीन फिलहाल जेल नंबर 7 के एक वार्ड में अकेला रह रहा है. उस पर सीसीटीवी से पैनी नजर रखी जाएगी. उसे जेल या वार्ड शिफ्ट किया जाएगा या नहीं फिलहाल इस पर फैसला नहीं लिया गया है.

बुधवार शाम यासीन मलिक को हवालात से कोर्टरूम लाया गया था. जज को पहुंचने में देर होने पर उसे बैठने के लिए कुर्सी दी गई. कुछ देर बात जज आए और फैसला सुना दिया. बता दें कि यासीन मलिक को कुल 9 धाराओं के तहत सजा सुनाई गई.

मलिक की सजा पर पहले 3.30 बजे फैसला आना था, फिर इसे 4 बजे तक के लिए टाल दिया गया. इसके बाद करीब 6.15 बजे फैसला सुनाया गया. इस बीच अदालत के बाहर कई लोग तिरंगा लेकर पहुंचे. वहीं, श्रीनगर के पास मैसुमा में यासीन मलिक के घर के पास मलिक समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प की बात सामने आई. यहां पत्थरबाजी के बाद हालात सुरक्षाकर्मियों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े. 

श्रीनगर के पास मैसुमा में यासीन मलिक का घर है. मलिक के घर के आसपास सुरक्षाबल के जवान तैनात हो किए गए थे. ड्रोन से इलाके की निगरानी की जा रही थी. बता दें कि NIA ने यासीन मलिक को सजा ए मौत देने की मांग की थी. सजा के ऐलान से पहले कोर्टरूम के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी. सुरक्षाकर्मियों के अलावा सादे कपड़ों में भी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी. कोर्टरूम में डॉग स्क्वॉड के जरिए जांच की जा रही थी.

यासीन मलिक को मिली सजा और जुर्माना

धारा  सजा जुर्माना
120B 10 साल 10 हजार
121 उम्रकैद 10 हजार
121A 10 साल 10 हजार
UAPA धारा 13 5 साल 5 हजार
UAPA धारा 15 10 10 हजार
UAPA धारा 17 उम्रकैद 10 लाख
UAPA धारा 18 10 साल 10 हजार
UAPA की धारा 38-39 5 साल 5 हजार

 यासीन मलिक को UAPA की धारा 18, 19, 20, 38 और 39 के तहत दोषी पाया गया. धारा 38 तब लगती है, जब आरोपी के आतंकी संगठन से जुड़े होने की बात पता चलती है. धारा 39 आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने पर लगाई जाती है. गैरकानूनी संगठनों, आतंकवादी गैंग और संगठनों की सदस्यता को लेकर इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है. सरकार द्वारा घोषित आतंकी संगठन का सदस्य पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है. वहीं, धारा 121 A राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध का प्रयास करने पर लगाई जाती है.

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फैसले के पहले यासीन मलिक के वकील ने उनकी प्रॉपर्टी के बारे में बताया. मलिक के पास 11 कनाल यानी करीब 5564 वर्ग मीटर जमीन है, जो उसने पुश्तैनी बताई. इससे पहले गुरुवार को कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया था. यासीन मलिक ने सुनवाई के दौरान कबूल कर लिया था कि वह कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल था. मलिक को दिल्ली की पटियाला कोर्ट लाया गया. कोर्ट में सजा पर बहस हुई. इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. 

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सजा पर कुछ नहीं बोलूंगा- यासीन मलिक

कोर्ट रूम में मौजूद वकील फरहान ने बताया कि यासीन मलिक ने कोर्ट में कहा की वो सजा पर कुछ नहीं बोलेगा. कोर्ट दिल खोल कर उसको सजा दे. मलिक ने कहा, मेरी तरफ से सजा के लिए कोई बात नहीं होगी. वहीं, NIA ने यासीन मलिक को फांसी देने की मांग की. इसके बाद यासीन मलिक 10 मिनट तक शांत रहा. यासीन मलिक ने कोर्ट में कहा कि मुझे जब भी कहा गया मैंने समर्पण किया, बाकी कोर्ट को जो ठीक लगे वो उसके लिए तैयार है. 

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कोर्ट ने ठहराया दोषी

कोर्ट ने माना है कि मलिक ने 'आजादी' के नाम जम्मू कश्मीर में आतंकवादी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने के मकसद से दुनिया भर में एक नेटवर्क स्थापित कर लिया था. NIA ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में 30 मई 2017 को केस दर्ज किया था. इस मामले में एक दर्जन के अधिक लोगों के खिलाफ 18 जनवरी 2018 को चार्जशीट फाइल की गई थी.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कोर्ट में कहा था, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान की आईएसआई के समर्थन से नागरिकों और सुरक्षाबलों पर हमला करके घाटी में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया. 

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यासीन मलिक ने गुनाह किया कबूल

 यासीन मलिक ने कोर्ट में कहा था कि वह यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी गतिविधि), 17 (आतंकवादी गतिवधि के लिए धन जुटाने), 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश रचने), व 20 (आतंकवादी समूह या संगठन का सदस्य होने) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) व 124-ए (देशद्रोह) के तहत खुद पर लगे आरोपों को चुनौती नहीं देना चाहता.

 

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