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कई राज्यों में बारिश के बीच लू और धूल भरी आंधी का भी अलर्ट, जानें आज का मौसम

देशभर में मौसम अपने अलग-अलग रंग दिखा रहा है. दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश राहत लेकर आ सकती है, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में धूल भरी आंधी और गरज-चमक का अलर्ट जारी है.

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धूल भरी आंधी और तूफान का भी अलर्ट (Photo-PTI)
धूल भरी आंधी और तूफान का भी अलर्ट (Photo-PTI)

देश में एक तरफ कई राज्यों में बारिश के संकेत हैं, तो दूसरी ओर उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में लू और धूल भरी आंधी की चेतावनी जारी की गई है. साथ ही दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार अभी भी कमजोर बनी हुई है और इसका विस्तार रुक-सा गया है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इंटीरियर तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं.

इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पूर्वी बिहार, दक्षिण कर्नाटक, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है.

कहां होगी हल्की बारिश?

ओडिशा, विदर्भ, दक्षिण-पूर्व राजस्थान, दक्षिण और पूर्वी गुजरात तथा कोंकण और गोवा में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है. हालांकि यह बारिश छिटपुट होगी और लगातार नहीं रहेगी.

उत्तर भारत में आंधी और धूल भरी हवाओं का अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों-पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में गरज-चमक के साथ धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई गई है. तेज हवाओं के कारण तापमान में अचानक बदलाव और अस्थिर मौसम देखने को मिल सकता है.

उत्तर प्रदेश में लू का खतरा

उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हीटवेव (लू) की स्थिति बन सकती है. दिन के समय तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे गर्मी का असर और बढ़ सकता है.

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मॉनसून पर अपडेट

मॉनसून की उत्तरी सीमा (NLM) अभी भी दो प्रमुख स्थानों पर अटकी हुई है. पश्चिमी छोर हरनाई (महाराष्ट्र) के पास और पूर्वी छोर मुजफ्फरपुर (बिहार) के आसपास स्थिर है.

इस वजह से देश के बड़े हिस्से में बारिश की स्थिति कमजोर बनी हुई है और कई क्षेत्र अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं. मध्य भारत में सबसे अधिक असर देखा जा रहा है, जहां कई इलाकों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है.

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित नहीं हुई है, जो मानसून को आगे बढ़ाने में मदद कर सके.

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