इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2023 के दूसरे और आखिरी दिन भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने कहा कि भारत के महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग जुलाई में की जाएगी. इसरो के चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की योजना है.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ में 'द स्पेस क्वेस्ट' सेशन को संबोधित करते हुए इसरो प्रमुख सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान-3 कई मायनों में चंद्रयान-2 जैसा ही है. इन दोनों मिशनों का साइंटिफिक आर्किटेक्चर एक जैसा है और मिशन का लक्ष्य भी समान है. इसकी लॉन्चिंग की तारीख का जल्द ऐलान किया जाएगा.
क्यों हुआ था चंद्रयान-2 फेल?
चंद्रयान-2 मिशन की असफलता को लेकर इसरो प्रमुख ने कहा कि चंद्रयान-2 असफल हुआ है लेकिन उसका ऑर्बिटर वहीं है और हमें डेटा दे रहा है. हमें यह समझने में काफी समय लगा कि चूक कहां हुई और समस्या क्या थी. दरअसल उसके सॉफ्टवेयर में दिक्कत थी.
उन्होंने गगनयान मिशन के बारे में कहा कि इस मिशन के लिए चार पायलट्स बतौर एस्ट्रोनॉट ट्रेनी के तौर पर हमारे साथ जुड़े हैं. हम मिशन के लिए उस मॉड्यूल को डिजाइन और तैयार कर रहे हैं, जिसमें वह बैठेंगे.
उन्होंने कहा कि इसरोको यह सुनिश्चित करने के लिए कम से कम चार स्पेस मिशन की जरूरत है कि हमार क्रू रेस्क्यू सिस्टम सही तरीके से काम करे. हमें मानवरहित मिशन भी शुरू करने होंगे.
सन मिशन आदित्य-एल1 अगस्त में होगा लॉन्च
इसरो प्रमुख ने भारत के पहले सोलर मिशन यानी सूर्य की स्टडी करने वाले स्पेसक्राफ्ट आदित्य-एल1 (Aditya-L1) को अगस्त में लॉन्च करने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि यह स्पेसक्राफ्ट Lagrange प्वाइंट पर लॉन्च किया जाएगा.
भारतीय सूर्ययान यानी आदित्य-एल1 में सात पेलोड्स हैं. जिनमें से छह पेलोड्स इसरो और अन्य संस्थानों ने बनाया है. आदित्य-एल1 स्पेसक्राफ्ट को धरती और सूरज के बीच एल1 ऑर्बिट में रखा जाएगा. यानी सूरज और धरती के सिस्टम के बीच मौजूद पहला लैरेंजियन प्वाइंट. लैरेंजियन प्वाइंट असल में अंतरिक्ष का पार्किंग स्पेस है. जहां पर कई उपग्रह तैनात किए गए हैं. यानी भारत का सूर्ययान धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित इस प्वाइंट पर तैनात किया जाएगा. इस जगह से वह सूरज का अध्ययन करेगा. वह सूरज के करीब नहीं जाएगा.
एलन मस्क एक प्रेरणा हैं
यह पूछने पर कि आज के समय में एलन मस्क और बेजोस जैसे अरबपति बहुत कम समय में स्पेस की दुनिया में कदम रख रहे हैं. लेकिन इसरो को इसी काम में दशकों का समय लग गया. इस पर इसरो प्रमुख ने कहा कि हमें स्पेस की जियोपॉलिटिकल को समझना पड़ेगा. भारत से उसकी तुलना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि एलन मस्क एक प्रेरणा हैं. वह शिद्दत के साथ मिशन पर जुटे हुए हैं.
इसरो प्रमुख ने कहा कि आने वाले सालों में स्पेस जगत में बहुत बदलाव देखने को मिलेंगे. हम कई मिशन पर काम कर रहे हैं. महिलाओं को स्पेस में भेजे जाने पर उन्होंने कहा कि हम वीमेन इन स्पेस के बजाए ह्यूमन इन स्पेस पर जोर देते हैं. इसके अलावा अनमैन्ड मिशन, रोबॉटिक मिशन भी बहुत अहम हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी मिशन के फेल होने पर सबसे पहले क्रू की सेफ्टी हमारे लिए प्राथमिकता है. हम इस पर काम भी कर रहे हैं.