हिंदी दिवस पर गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं को लेकर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं. शाह ने कहा कि देश की हर भाषा अपने साथ इतिहास, लोकपरंपरा और जीवन-दृष्टि लेकर चलती है.
उन्होंने कहा कि भाषाई बहुलता भारत की ‘विविधता में एकता’ की भावना को मजबूत करती है. भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की स्मृति और आत्मबोध है. शाह ने कहा कि हिंदी किसी भारतीय भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि भाषाओं के बीच आत्मीय संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी है. हिंदी का विकास तभी सार्थक है, जब सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन के साथ आगे बढ़े.
अमित शाह ने स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण देते हुए हिंदी की राष्ट्रीय भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, 'मेरी मातृभाषा गुजराती है, लेकिन देश के किसी भी कोने में सामान्यजन से जोड़ने वाली भाषा हिंदी है.'
राष्ट्रीय चेतना को नई
शाह ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में स्वराज, स्वदेशी और स्वभाषा ने राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा दी. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को शिक्षा के केंद्र में रखा गया है. इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा भारतीय भाषाओं में हो रही है और प्रतियोगी परीक्षाएं भी अनेक भारतीय भाषाओं में आयोजित की जा रही हैं.
अमित शाह ने कहा कि तकनीक के दौर में भारतीय भाषाएं पीछे नहीं हैं, बल्कि तकनीकी विकास का स्वर्णिम युग देख रही हैं. शाह ने कहा कि AI आधारित ‘भारती’ टूल भारतीय भाषाओं के बीच संवाद को आसान बना रहा है. ‘हिंदी शब्द सिंधु’ में 8.27 लाख से अधिक प्रविष्टियां हैं और यह डिजिटल शब्दकोश के रूप में महत्वपूर्ण माध्यम बना है. उन्होंने कहा कि AI और अनुवाद तकनीक ने भाषा की दीवारें गिरा दी हैं.
अपनी भाषा न छोडें
युवाओं से अपील करते हुए शाह ने कहा कि दुनिया की जितनी भाषाएं सीख सकें, सीखें, लेकिन अपनी भाषा को न छोड़ें. उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ अपनी मातृभाषा में बातचीत करने का आग्रह किया. शाह ने कहा, “मैं अपनी भाषा में बोलूंगा तो छोटा हो जाऊंगा” वाली लघुता ग्रंथि से बड़ा कोई पाप नहीं. उन्होंने कहा कि भाषा हमें मां, मिट्टी, इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है. शाह ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में हिंदी और सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त माध्यम बनाने का संकल्प लेने की बात कही. उन्होंने वंदे मातरम की रचना के 150वें वर्ष का भी उल्लेख किया और इसे भाषा को स्वतंत्रता का शस्त्र बनाने वाले गीत के रूप में याद किया.