एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आया है. हरदीप पुरी पर एपस्टीन फाइल्स में लगाए गए आरोपों को केंद्र सरकार ने भी गंभीरता से लिया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र आंतरिक स्तर पर इस मामले की वेरिफिकेशन करा रही है और इस दौरान हरदीप पुरी का पक्ष भी विस्तार से लिया गया है.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि शुरुआती वेरिफिकेशन में हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ किसी तरह की गलत जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई या मंत्रिमंडल से हटाने का कोई सवाल नहीं उठता.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़ी फाइलों में हरदीप पुरी का नाम कई बार आया है. इनमें निजी बैठकों और ईमेल में बातचीत का जिक्र है. साथ ही उनका नाम एपस्टीन फाइल्स से भी जोड़ा जा रहा है.
कांग्रेस ने पुरी से मांगा इस्तीफा
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 2014 से 2017 के बीच हरदीप सिंह पुरी और जेफरू एपस्टीन के बीच 62 ईमेल का शेयर और रिसीव हुए. पार्टी का दावा है कि इस दौरान 14 बैठकें भी दर्ज हैं, जिनमें से 32 ईमेल पुरी की ओर से और 30 एपस्टीन की ओर से भेजे गए. कांग्रेस ने पुरी से इन कथित संपर्कों की वजह स्पष्ट करने और नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है.
पुरी ने कबूल की एपस्टीन से मिलने की बात
हालांकि, हरदीप सिंह पुरी इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर चुके हैं. उन्होंने इन्हें 'बेबुनियाद' और 'राजनीतिक षड्यंत्र' करार दिया है. पुरी का कहना है कि उनका नाम 163 बार आने का दावा झूठा है. पुरी ने स्वीकार किया कि किसी आधिकारिक या पेशेवर संदर्भ में उन्होंने एपस्टीन से ज्यादा से ज्यादा चार बार मुलाकात की होगी.
यह भी पढ़ें: एपस्टीन पर हंगामे के बीच किंग चार्ल्स के भाई एंड्रयू गिरफ्तार, बर्थडे पर एक्शन
वहीं, उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में पुरी का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है. अब बीजेपी उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजती है या नहीं, इस पर सस्पेंस बना हुआ है. इससे पहले पार्टी ने 2022 में मुख्तार अब्बास नकवी को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा था, जिसके बाद उन्हें मंत्रिमंडल छोड़ना पड़ा था. इसी तरह जेडीयू कोटे से मंत्री बने RCP सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद उनकी भी मंत्रिमंडल से विदाई हो गई थी.