अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. जोशी ने आजतक को दिए एक खास इंटरव्यू में 'ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना' का विरोध करने वालों पर पलटवार किया. उन्होंने इस रणनीतिक परियोजना के खिलाफ हो रहे विरोध को पूरी तरह भ्रामक और अज्ञानता से प्रेरित करार दिया है.
द्वीप विकास एजेंसी के उपाध्यक्ष भी रहे एडमिरल डीके जोशी ने साफ कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना के कारण किसी भी आदिवासी समुदाय को विस्थापित नहीं किया जाएगा. परियोजना के लिए सभी कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरियां तय प्रक्रिया का पालन करते हुए हासिल की गई हैं.
पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर उन्होंने कहा कि अंडमान और निकोबार में 94% जंगल हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ 1.8% जंगल की जमीन का इस्तेमाल होगा. इसके बदले दूसरी जगहों पर नए पेड़ लगाए जाएंगे. नियमों के अनुसार जिन इलाकों में वन क्षेत्र कम है, वहां वनीकरण (अफॉरेस्टेशन) भी किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट केवल आर्थिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक और भू-राजनीतिक क्षमता को बढ़ाने वाला कदम है. उनके मुताबिक, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को अपनी भौगोलिक स्थिति का बड़ा लाभ प्राप्त है और यह परियोजना उस लाभ को और मजबूत करेगी.
उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री चोक प्वाइंट्स पर प्रभाव रखता है और ग्रेट निकोबार परियोजना से न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र के कई देशों को फायदा होगा. उनके अनुसार, यह परियोजना क्षेत्रीय व्यापार, कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दे सकती है.
परियोजना को लेकर कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए गए सवालों पर डीके जोशी ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई है, फिर यह दावा कैसे किया जा सकता है कि किसी विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए परियोजना बनाई जा रही है. उन्होंने इसे तथ्यों से परे बताया.
पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि देश की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का अतीत में भी विरोध हुआ है. उन्होंने सरदार सरोवर बांध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस परियोजना को भी विभिन्न हित समूहों ने रोकने की कोशिश की थी, लेकिन अंततः वह देश के विकास में महत्वपूर्ण साबित हुई.
उन्होंने दो टूक कहा कि भारत के विकास और रणनीतिक हितों से जुड़े इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को रोकने की कोशिशें सफल नहीं होंगी. ग्रेट निकोबार परियोजना के लिए यही समय है, सही समय है और देश को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए.