केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में परिसीमन बिल लाने की तैयारी कर रही है. इस बार सरकार बिल पेश करने से पहले सभी बड़े क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलना चाहती है. इसी कोशिश में DMK और TMC जैसे दलों से बातचीत शुरू हो चुकी है.
केंद्र सरकार इस बार स्मार्ट तरीके से आगे बढ़ना चाहती है. पिछली बार जब यह मुद्दा उठा था तो काफी विरोध हुआ था. सूत्रों के अनुसार, इसलिए इस बार सरकार ने पहले ही क्षेत्रीय दलों से बातचीत शुरू कर दी है. TMC यानी ममता बनर्जी की पार्टी और DMK यानी तमिलनाडु में स्टालिन की पार्टी, दोनों से सरकार ने संपर्क किया है.
TMC का रुख क्या है?
सूत्रों के मुताबिक TMC के कई सांसद सरकार की बात सुनने और बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार हैं. उन्होंने सकारात्मक रुख दिखाया है. हालांकि पार्टी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. मतलब खुलकर न हां कही है न ना.
DMK का रुख क्या है?
DMK ने भी बातचीत में कोई सख्त रुख नहीं अपनाया है. पार्टी फिलहाल सरकार के नए ड्राफ्ट यानी बिल के नए लिखित प्रस्ताव का इंतजार कर रही है. जब नया प्रस्ताव सामने आएगा तब DMK अपनी पूरी राय देगी.
परिसीमन क्या होता है?
देश में लोकसभा और विधानसभा की सीटें तय होती हैं. हर सीट के लिए एक इलाका होता है जिसे 'निर्वाचन क्षेत्र' कहते हैं. परिसीमन यानी इन इलाकों की सीमाएं नए सिरे से तय करना. जनसंख्या बढ़ती है, लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, तो सीटों की सीमाएं और संख्या बदलने की जरूरत पड़ती है. इसी काम को परिसीमन कहते हैं.
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विवाद कहां से है?
दक्षिण के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरलम, कर्नाटक वगैरह में जनसंख्या कम बढ़ी है क्योंकि इन राज्यों ने परिवार नियोजन यानी छोटे परिवार की नीति को अच्छे से अपनाया.
उत्तर के राज्यों जैसे यूपी, बिहार में जनसंख्या ज्यादा बढ़ी है. अब अगर जनसंख्या के हिसाब से सीटें तय हुईं तो दक्षिण के राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी और उत्तर की ज्यादा.
दक्षिण के राज्यों को डर है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया और बदले में उनकी संसद में ताकत कम हो जाएगी. यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा विवाद है.
सरकार की रणनीति क्या है?
सरकार चाहती है कि बिल संसद में आने से पहले ज्यादा से ज्यादा दल उसके साथ हों. इससे बिल पास होने में आसानी होगी और विरोध भी कम होगा. इसीलिए मानसून सत्र शुरू होने से पहले और बैठकें और बातचीत होने की उम्मीद है.
आगे क्या होगा?
सबसे पहले सरकार बिल का नया ड्राफ्ट तैयार करेगी. फिर उसे सभी दलों को दिखाया जाएगा. अगर सहमति बनती है तो मानसून सत्र में यह बिल संसद में पेश हो सकता है. अगर सहमति नहीं बनी तो फिर से विवाद और विरोध की स्थिति बन सकती है. फिलहाल सबकी नजर इसी नए ड्राफ्ट पर है.
अब तक कितने बार परिसीमन किया गया?
अब तक कुल चार बार परिसीमन किया गया. पहली बार 1952, फिर 1962, फिर 1973 और आखिरी बार 2002 में हुई थी. तब से 543 पर ही सीटें फ्रीज हैं.
कब शुरू होगी मानसून सत्र?
मानसून सत्र आमतौर पर हर साल जुलाई के तीसरे सप्ताह से शुरू होता है और अगस्त के मध्य तक चलता है. साल 2025 की बात करें तो, पिछले साल 21 जुलाई से लेकर 21 अगस्त तक चला था.