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आज से दिल्ली में ऑटो-टैक्सी का चक्का जाम, जानिए उनकी डिमांड्स क्या हैं, ग्रीन टैक्स के खिलाफ 16 लाख ट्रक भी आउट ऑफ रोड

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आज यानी गुरुवार से तीन दिवसीय परिवहन हड़ताल शुरू हो गई है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के आह्वान पर करीब 68 ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों ने सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों पर ग्रीन टैक्स (पर्यावरण मुआवजा उपकर) बढ़ाए जाने के फैसले के खिलाफ सड़कों पर न उतरने का एलान किया है.

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दिल्ली-NCR में ट्रैक्सी ड्राइवरों की हड़ताल. (photo: Social Media @ANI)
दिल्ली-NCR में ट्रैक्सी ड्राइवरों की हड़ताल. (photo: Social Media @ANI)

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में दिल्ली-NCR की 68 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों की तीन दिवसीय हड़ताल ने दिल्ली आ रहे यात्रियों को परेशानी बढ़ा दी है. दिल्ली के कई रेलवे स्टेशनों के बाहर निलते यात्रियों की भारी भीड़ दिख रही है जो बसों और मेट्रो स्टेशनों की ओर रुख कर रही है.

इस चक्का जाम में हल्के कमर्शियल वाहनों, ट्रकों और टैक्सियों के ऑपरेटर दिल्ली सरकार द्वारा ग्रीन टैक्स में की गई भारी बढ़ोतरी के विरोध में शामिल हुए हैं. हड़ताल के कारण दिल्ली-एनसीआर में दूध, फल और सब्जी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है, क्योंकि आवश्यक सेवाओं से जुड़े ट्रांसपोर्टरों ने भी इस बंद को अपना पूरा समर्थन दिया है.

हालांकि, ओला-उबर और ऑटो इस हड़ताल में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन उन्होंने ट्रांसपोर्टर्स की मांगों का पूरा समर्थन किया है. परिवहन संगठन मांग कर रहे हैं कि नए बढ़े हुए रेट वापस लिए जाएं, क्योंकि हर साल इसमें होने वाली 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी और एमसीडी द्वारा वसूला जाने वाला ₹1200 प्रति ट्रिप का टैक्स मध्यम वर्गीय ऑपरेटरों की कमर तोड़ रहा है.

यहां हड़ताल से जुड़े तमाम अपड़ेट...

-टैक्सी चालकों ने किराए में गिरावट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, सरकार से हस्तक्षेप की मांग की
टैक्सी चालकों ने घटती आय और कम सवारी को लेकर चिंता जताई है. उनका दावा है कि ऐप-आधारित एग्रीगेटरों ने हाल के हफ्तों में किराए में भारी कटौती की है. 

चालकों ने कहा कि प्रोत्साहन राशि और प्रति किलोमीटर भुगतान लगभग आधा हो गया है, जिससे उनकी आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है. कई टैक्सी संचालकों ने उचित मूल्य निर्धारण और सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए 21 से 23 मई तक विरोध प्रदर्शन शुरू किया है. 

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उनका कहना है कि बढ़ती परिचालन लागत और घटती आय के कारण उनके लिए अपना व्यवसाय चलाना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है.

-संजय गांधी परिवहन नगर में पसरा सन्नाटा
आम तौर पर लोडिंग और अनलोडिंग की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले संजय गांधी परिवहन नगर में कई ट्रक सड़कों से गायब नजर आए.

दिल्ली सरकार के उपकर संबंधी फैसले के विरोध में दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट और टैक्सी यूनियनों द्वारा तीन दिवसीय हड़ताल के चलते नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. 23 मई तक चलने वाली टैक्सी ड्राइवरों की ये हड़ताल दिल्ली सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति उपकर बढ़ाने के फैसले के खिलाफ है.


ग्रीन टैक्स दरों में भारी बढ़ोतरी से नाराजगी

बताया जा रहा है कि ट्रांसपोर्टर्स की मुख्य नाराजगी अप्रैल से लागू हुई नई दरों को लेकर है. दिल्ली में एंट्री करने वाले हल्के कमर्शियल वाहनों और दो-एक्सल वाले ट्रकों पर ग्रीन टैक्स ₹1,400 से बढ़ाकर ₹2,000 प्रति ट्रिप कर दिया गया है. इसके साथ ही तीन और चार-एक्सल वाले बड़े ट्रकों के लिए ये फीस ₹2,600 से सीधे बढ़ाकर ₹4,000 प्रति ट्रिप कर दी गई है. इन दरों में प्रतिवर्ष 5 फीसदी की बढ़ोतरी का भी प्रावधान है.

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दूध और सब्जी की सप्लाई पर पड़ेगा असर

इस तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को आवश्यक सेवाओं (एसेंशियल सर्विस) में शामिल ट्रांसपोर्टरों ने भी अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. इसके चलते दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में रोजमर्रा की जरूरतों जैसे दूध, फल और सब्जियों की किल्लत होने की आशंका बढ़ गई है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं होता, तब तक 16 लाख ट्रक सड़कों पर नहीं उतरेंगे.

दिल्ली में टैक्सी चलाने वाले ड्राइवर दिनेश कुमार ने समाचार एजेंसी को बताया कि बाजार में किराए की कोई कीमत नहीं है… हमें ज्यादा सवारी भी नहीं मिलती… मैं सरकार से अपील करूंगा कि टैक्सी किराए पर भी कुछ ध्यान दें.

दूसरी ओर टैक्सी चालक नरेंद्र तिवारी कहना है कि हालात बहुत खराब हैं, क्योंकि किराया बहुत कम हो गया है. रैपिडो 18 से 25 अप्रैल तक 30 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान कर रहा था जो अब घटकर 15-16 रुपये रह गया है… हम 21 से 23 अप्रैल तक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, तो देखते हैं क्या होता है.

वहीं, दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग की ओर से अभी तक इस हड़ताल पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. आम लोगों को सलाह दी जा रही है कि अगले तीन दिनों तक जरूरी सामान पहले से ही खरीद लें और जहां तक संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें.

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