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भारत में एक मंच पर होंगे मोदी, पुतिन और जिनपिंग, तय हो गया महा-मीटिंग का शेड्यूल

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसी इसी साल सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन होने वाला है. इसमें रूसी राष्ट्रपति पुतिन शामिल और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है.

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PM मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी प्रेसिडेंट जिनपिंग 2025 में तियानजिन में SCO समिट में मिले थे. (File Photo: ITG)
PM मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी प्रेसिडेंट जिनपिंग 2025 में तियानजिन में SCO समिट में मिले थे. (File Photo: ITG)

दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल के बीच, भारत सितंबर में दुनिया के बड़े नेताओं की एक अहम बैठक का गवाह बनने जा रहा है, क्योंकि वह BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की पुष्टि कर दी है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है.

दो दिनों तक चलने वाले इस BRICS समिट में पुतिन के शामिल होने की पुष्टि दक्षिण अफ्रीका में मौजूद रूसी दूतावास ने की है.

रूस की समाचार एजेंसी Tass की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है.

2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे जिनपिंग 

नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना की खबर बुधवार को 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने दी थी. अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि BRICS शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग का शामिल होना सबसे ज्यादा चर्चित और बहुप्रतीक्षित दौरा है."

अगर शी जिनपिंग का यह दौरा होता है, तो अक्टूबर 2019 के बाद यह भारत का उनका पहला दौरा होगा. उस वक्त उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.

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जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों और दिसंबर 2022 में तवांग सीमा पर बने तनावपूर्ण हालात का भारत-चीन संबंधों पर बहुत बुरा असर पड़ा. रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ही, सीमा पर तनाव के बाद पहली बार मोदी और शी की मुलाकात हुई.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का टाइम और इसमें रूस और चीन के नेताओं की मौजूदगी, ऐसे वक्त में बेहद अहम है, जब समूह के अंदर अहम भू-राजनीतिक मुद्दों, खासकर ईरान युद्ध को लेकर साफ तौर पर अंदरूनी मतभेद दिखाई दे रहे हैं.

यह भी पढ़ें: दिल्ली में BRICS की बैठक, क्या मिडिल ईस्ट जंग का निकलेगा हल?

11-सदस्यीय समूह के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों के बीच 24 अप्रैल को नई दिल्ली में हुई BRICS वार्ता के बाद दरारें साफ नजर आने लगीं. यह वार्ता कोई संयुक्त बयान जारी करने में नाकाम रही, क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध, ईरान और UAE के बीच तनाव और इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत द्वारा प्रस्तावित कथित शब्दों में बदलाव को लेकर मतभेद सामने आए. इससे एक कूटनीतिक गतिरोध पैदा हो गया.

भारत अब इन आंतरिक मतभेदों को सुलझाने और तेजी से ध्रुवीकृत हो रहे ग्लोबल सिनेरियो में इस समूह को एकजुट रखने में एक अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार नजर आ रहा है. बता दें कि जनवरी 2026 में भारत ने BRICS की अध्यक्षता की थी. 

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