बेंगलुरु में आईटी कंपनी कैपजेमिनी (Capgemini) के कैंपस में संचालित डे-केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद कंपनी ने सेंटर को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. इस मामले में पुलिस ने अब दूसरी डे-केयर कर्मचारी सुजाता को भी गिरफ्तार किया है. शुरुआती जांच में पता चला है कि उसने बच्चों के साथ हो रहे अत्याचार के वीडियो रिकॉर्ड किए थे. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने इन वीडियो को अधिकारियों को सौंपने के बजाय कहीं प्रसारित या साझा तो नहीं किया.
कैपजेमिनी ने डे-केयर सेंटर किया बंद
कैपजेमिनी ने जारी बयान में कहा कि बेंगलुरु कैंपस में संचालित यह डे-केयर सेंटर बाहरी एजेंसी 'लिटिल स्कॉलर्स' (Little Scholars) द्वारा संचालित किया जा रहा था. कंपनी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है.
कंपनी ने कहा कि घटना के बाद पिछले 48 घंटों में कई अहम कदम उठाए गए हैं. इनमें डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद करना, पुलिस जांच में पूरा सहयोग देना और प्रभावित परिवारों के लिए हेल्पलाइन, काउंसलिंग तथा कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है.
पूरे भारत में डे-केयर सुविधाओं की होगी समीक्षा
कैपजेमिनी ने यह भी घोषणा की है कि वह भारत में अपने सभी कैंपसों में संचालित डे-केयर सुविधाओं की समीक्षा करेगी. कंपनी का कहना है कि उसके सभी डे-केयर पार्टनर्स का पहले से बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और अनुपालन जांच की जाती है, लेकिन इस घटना के बाद पूरी व्यवस्था का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा.
पांच महिलाओं के खिलाफ केस, दूसरी आरोपी भी गिरफ्तार
इस मामले में सोशल मीडिया पर बच्चों के साथ कथित मारपीट के वीडियो वायरल होने के बाद HAL पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच महिलाओं मंजुला, विजयलक्ष्मी, भवानी, सिंधु और बिंदु के खिलाफ मामला दर्ज किया था. सभी पर जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 (आपराधिक धमकी) के तहत केस दर्ज किया गया है.
अब दूसरी कर्मचारी सुजाता की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या उसने बच्चों के उत्पीड़न के वीडियो किसी अन्य व्यक्ति को भेजे या सोशल मीडिया पर प्रसारित किए थे. गिरफ्तार आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा.
केवल दस्तावेज नहीं, व्यवहार की भी जांच जरूरी
वरिष्ठ क्लिनिकल चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बरमी ने कहा कि बच्चों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले केवल पुलिस वेरिफिकेशन पर्याप्त नहीं है. उनकी संवेदनशीलता, धैर्य, व्यवहार, संकट से निपटने की क्षमता और बच्चों की सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण का भी मूल्यांकन अनिवार्य होना चाहिए.
शिक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
कर्नाटक एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल्स के महासचिव शशि कुमार ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया. उन्होंने कहा कि 2018 शिक्षा अधिनियम के अनुसार सभी प्री-प्राइमरी स्कूलों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. अगर संस्थान रजिस्टर्ड नहीं हैं तो उन पर प्रभावी निगरानी नहीं हो पाती. उन्होंने इस मामले में शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए.
पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि बच्चों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. इस घटना के बाद कॉरपोरेट कार्यालयों में संचालित डे-केयर सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.