गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद पर हुई चर्चा का जवाब दिया. अमित शाह ने नक्सलवाद को अन्याय के खिलाफ नहीं, वामपंथी विचारधारा को फैलाने की लड़ाई बताया और कांग्रेस पार्टी को भी निशाने पर रखा. उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने अपनी विचारधारा के विस्तार के लिए उन्हीं सुदूर इलाकों को चुना, जहां तक स्टेट नहीं पहुंचा था. नक्सलवाद की हार का सबसे बड़ा कारण यही है कि राज्य अब हर गांव में पहुंच गया है. वहां पंचायतों का गठन हो चुका है.
अमित शाह ने कहा कि देश के सामने तीन तारीखों की चर्चा करना चाहता हूं- 20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026. उन्होंने कहा कि 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई. पूर्व नक्सलियों को खुफिया इनपुट में लेने का काम, ये सब उसी मीटिंग में डिजाइन किए गए. देर क्यों लगी, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी. अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने नक्सलवादियों को बचाकर रखा. इस पर विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया.
कांग्रेस सदस्यों ने आपत्ति करते हुए कहा कि भूपेश बघेल इस सदन के सदस्य नहीं हैं, उन पर आरोप लगाया जा रहा है. अमित शाह ने इस पर कहा कि मुझे किसी व्यक्ति के सामने नहीं करना है. हां, मैं आरोप ही कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल को पूछो प्रूफ दूं क्या यहां पर. हां बोलें तो बोलो, वरना फंस जाओगे. अमित शाह ने कहा कि 2023 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली और दूसरे ही महीने वहां गया था. बीजेपी की सरकार आई थी. बीजेपी की सरकार ने ने पूरे सहयोग का आश्वासन दिया था.
अमित शाह ने आगे कहा कि 24 अगस्त 2024 को हमने यह ऐलान किया कि 31 मार्च 2026 को हम नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त कर देंगे. उन्होंने साल 2014 के बाद उठाए गए कदम गिनाए और कहा कि कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर दी गई. अमित शाह ने कहा कि नक्सली वोट से नहीं, बुलेट से सत्ता चाहते हैं. नक्सलियों से लड़ते हुए पांच हजार जवान शहीद हुए. कुछ लोग बातों से नहीं मानते. बच्चों का अपहरण कर उनको नक्सली बनाया गया. किसानों के खेत में बारूद बिछाकर उनको बगैर पैर का बना दिया गया.
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उन्होंने कहा कि करीब दो हजार आर्टिकल पढ़े, जिनमें नक्सलियों की वकालत की गई थी. मैं इनको मानवतावादी नहीं मानता. अमित शाह ने कहा कि अगर ये मानवतावादी होते, तो उन बच्चों की भी बात करते. किसानों की भी बात करते. मानवतावादी दृष्टिकोण एकतरफा नहीं हो सकता. उन्होंने सलवा जुडूम का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट ने हथियार वापस लेने का आदेश दे दिया. नक्सलियों के हाथ में हथियार था, नक्सलियों ने सलवा जुडूम से जुड़े लोगों को चुन-चुनकर गोली मार दिया.
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अमित शाह ने कहा कि सलवा जुडूम से जुड़े आदिवासियों से हथियार वापस लेने का फैसला देने वाले वही जज सुदर्शन रेड्डी विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो कहती है न, कि हमारा क्या लेनादेना है. यही लेना-देना है. हम उनको वोट देने वालों की भी निंदा करता हूं. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आइडियोलॉजी कभी जनता के भले से ऊपर नहीं हो सकती. कभी अबोध आदिवासियों की सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकती. बस्तर में नक्सलियों ने समानांतर सरकार चलाई. इनका गृह मंत्री होता था.