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'पासपोर्ट रोके गए, लौटने नहीं दे रही यूनिवर्सिटी...', ओवैसी ने विदेश मंत्रालय से ईरान में फंसे छात्रों का इवैक्यूएशन प्लान मांगा

असदुद्दीन ओवैसी ने ईरान में जारी राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती हिंसा के बीच भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से चिंता व्यक्त की है. उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरानी अधिकारियों से बातचीत को सकारात्मक, लेकिन जमीन पर हालात चिंताजनक बताया.

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ईरान में फंसे भारतीय छात्रों पर ओवैसी की चिंता (Photo: PTI)
ईरान में फंसे भारतीय छात्रों पर ओवैसी की चिंता (Photo: PTI)

ईरान में चल रही राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती हिंसा के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा ईरानी समकक्ष से बातचीत करना एक सकारात्मक पहल जरूर है, लेकिन ज़मीनी हालात अत्यंत चिंताजनक बने हुए हैं.

ओवैसी के अनुसार, ईरान में सैकड़ों भारतीय छात्र पढ़ाई करते हैं, जिनमें से अधिकांश तेहरान की शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं. इस विश्वविद्यालय में लगभग 70 से 80 भारतीय छात्रों के फंसे होने की सूचना है, जिनमें 5 से 8 छात्र हैदराबाद के भी हैं. राजनीतिक संकट और हिंसक प्रदर्शन के कारण वहां छात्रों की स्थिति नाजुक हो गई है.

सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट सेवाओं के पूर्ण रूप से कट जाने की है, जिसकी वजह से छात्र अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. इससे पीड़ित माता-पिता मनोवैज्ञानिक रूप से टूट चुके हैं क्योंकि उन्हें कई दिनों से अपने बच्चों की कोई खबर नहीं मिल रही है. 

ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय छात्रों के पासपोर्ट नहीं लौटा रहा और उन्हें ईरान छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है.

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इसके साथ ही, कई छात्र गरीब परिवारों से आते हैं और उनके पास विदेश से वापसी के लिए आर्थिक साधन मौजूद नहीं हैं. ऐसे में केवल सलाह जारी करना पर्याप्त नहीं होगा. 

ओवैसी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वे एक समन्वित और औपचारिक निकासी योजना बनाकर फंसे छात्रों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए सक्रिय कदम उठाएं.

असदुद्दीन ओवैसी ने इस मानवीय संकट पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उम्मीद जताई है कि भारत सरकार इस मामले में गंभीरता दिखाएगी और जल्द समाधान निकालेगी ताकि छात्रों और उनके परिवारों की मानसिक पीड़ा को समाप्त किया जा सके.

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