मानसून सत्र के दौरान मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों ने NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन किया. सांसदों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए तख्तियां लहराईं और नारेबाजी की.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का धरना लगातार जारी है. देशभर से पहुंचे छात्र और युवा परीक्षा सुधार, जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं.
बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक्स पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी और एनडीए के सांसद संसद के बाहर NEET और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर चर्चा नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी. इसी उद्देश्य से फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला भी लिया गया है.
जंतर-मंतर पर उस स्थान पर सोनम वांगचुक की तस्वीर, संविधान की प्रतियां और संदेश रखा गया है, जहां वे अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे. यह आंदोलन के प्रतीक स्थल के रूप में देखा जा रहा है.
CJP के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जारी रहेगा.
जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा जुटे. प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी हुई और कई प्रदर्शनकारी अपने मोबाइल फोन से पूरे आंदोलन को लाइव भी करते दिखाई दिए.
संसद मार्ग और पटेल चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई. पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई.
दिनभर के प्रदर्शन के बाद भी जंतर-मंतर पर देर रात तक बड़ी संख्या में छात्र डटे रहे. आंदोलन स्थल पर भीड़ लगातार बनी रही और धरना खत्म नहीं हुआ.
रात के समय प्रदर्शनकारियों ने एकजुट होकर नारे लगाए और अपनी मांगों को दोहराया. आंदोलन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे प्रमुख तस्वीर बनकर सामने आई.
कई प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर ही रात बिताई. आंदोलन स्थल पर छात्र जमीन पर सोते दिखाई दिए, जबकि स्वयंसेवक उनके लिए भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं जुटाते रहे.
संसद परिसर में विपक्ष के प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन ने 23 जुलाई को विरोध की तस्वीरों को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया. एक ओर संसद में हंगामा हुआ, तो दूसरी ओर सड़क पर छात्रों का धरना जारी रहा.