पुणे के मोशी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में हुए भीषण हादसे में 9 मजदूरों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है. पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (PCMC) ने एंटनी कंपनी और उसके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति भी गठित की गई है.
इस हादसे में कचरे का विशाल ढेर ढह जाने से 23 मजदूर मलबे में दब गए थे. राहत एवं बचाव अभियान के दौरान 14 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन 9 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी. इस हादसे ने सुरक्षा मानकों और औद्योगिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कंपनी और अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी
हादसे के बाद एंटनी कंपनी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई. महाराष्ट्र सरकार में सहयोगी दल शिवसेना ने भी कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की थी. इसके कुछ घंटे बाद पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के आयुक्त विजय सूर्यवंशी ने कहा कि एंटनी कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति भी बनाई गई है, जो हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों की जांच करेगी.
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वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में अवैध निर्माण पर सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की इमारत को लेकर उठ रहा है. जानकारी के मुताबिक जिस भवन को केवल ग्राउंड फ्लोर तक निर्माण की अनुमति मिली थी, वहां दो मंजिला इमारत बना दी गई. नगरपालिका आयुक्त ने भी स्वीकार किया है कि यह इमारत अधिकृत नक्शे के अनुरूप नहीं थी. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ और संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की.
जांच में अधिकारियों की भूमिका भी होगी तय
अब जांच का दायरा केवल एंटनी कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा. यह भी जांच की जाएगी कि क्या प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण अनधिकृत निर्माण को अनुमति मिली. यदि समय रहते नियमों का पालन कराया गया होता, तो संभव है कि इस दर्दनाक हादसे में नौ मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी. फिलहाल जांच समिति पूरे मामले की पड़ताल कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.