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केतन बच जाता, अगर... पुणे में मंगेतर हत्याकांड पर एक और बड़ा खुलासा

पुणे के चर्चित केतन हत्याकांड में मृतक के पिता ने बड़ा दावा किया है. उनके अनुसार सिया ने केतन को लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मजबूर किया था. पिता का आरोप है कि 14 जून को भी सिया ने केतन को धक्का देकर मारने की कोशिश की थी, लेकिन वह झाड़ियों में फंसकर बच गया.

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कुछ ही दिनों में होने वाली थी केतन और सिया की शादी. (Photo: ITG)
कुछ ही दिनों में होने वाली थी केतन और सिया की शादी. (Photo: ITG)

पुणे के चर्चित केतन हत्याकांड में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इस मामले में पुलिस ने केतन की होने वाली पत्नी सिया और उसके कथित बॉयफ्रेंड चेतन को गिरफ्तार किया है. लेकिन अगर केतन सिया के साथ लोहगढ़ किले पर जाने से मना कर देता, तो शायद आज वह जिंदा होता. क्योंकि उसके पिता ने भी दावा किया है किया सिया बेटे को जिद करके किले पर ले गई थी.

केतन के पिता के मुताबिक सिया ने ही जन्मदिन मनाने के बहाने लोहगढ़ किले पर जाने की जिद की थी और केतन को अपने साथ चलने के लिए मजबूर किया. उन्होंने दावा किया कि सिया पहले से ही साजिश रच रही थी. 18 जून की सुबह करीब 8:20 बजे दोनों लोहगढ़ किले के लिए निकले थे. इसके बाद करीब 10:45 बजे सिया की मां का फोन आया और बताया गया कि केतन किले की घाटी में गिर गया है. जब तक परिवार के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.

14 जून को भी केतन को किले से दिया था धक्का
पिता ने यह भी आरोप लगाया कि जब केतन का शव घर लाया गया, तब सिया के चेहरे पर दुख या शोक के कोई भाव नहीं थे. परिवार को उसी समय उसके व्यवहार पर शक हो गया था. उनका कहना है कि सिया की प्रतिक्रिया सामान्य नहीं थी और वह पूरे समय असामान्य तरीके से पेश आ रही थी.

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मृतक के पिता ने एक और चौंकाने वाला दावा किया. उनके अनुसार, 14 जून को भी सिया और केतन लोहगढ़ किले पर गए थे. उस समय वहां दोनों ही मौजूद थे. पिता का आरोप है कि उसी दौरान सिया ने केतन को पीछे से धक्का देकर घाटी की ओर गिराने की कोशिश की थी. हालांकि, केतन का हाथ झाड़ियों में फंस गया, जिससे उसकी जान बच गई.

केतन को पहले ही हो गया था शक
पिता के मुताबिक उस घटना के बाद केतन को एहसास हो गया था कि उसे जानबूझकर धक्का दिया गया है. लेकिन सिया ने तुरंत "सांप आया... सांप आया..." चिल्लाना शुरू कर दिया और उसे गले लगाकर यह जताने की कोशिश की कि उसने उसे बचाने के लिए धक्का दिया था. इस वजह से केतन उस समय उसकी मंशा को पूरी तरह समझ नहीं पाया.

परिजनों का दावा है कि 14 जून की घटना असफल रहने के बाद 18 जून को जन्मदिन मनाने के बहाने केतन को दोबारा लोहगढ़ किले ले जाया गया. जहां उसकी मौत हो गई.

(पुणे से ओमकार के इनपुट के साथ)

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