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'बाजार छोड़...', दिल्ली के बाद मुंबई में CJP प्रदर्शन पर भड़के व्यापारी

मुंबई में त्योहारों के सीजन के दौरान CJP के विरोध प्रदर्शनों को लेकर व्यापारियों ने नाराजगी जताई है. व्यापारियों का कहना है कि बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शनों से ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार प्रभावित हो रहा है.

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त्योहारों के सीजन में CJP के प्रदर्शन से व्यापार प्रभावित, मुंबई के व्यापारियों ने जताई नाराजगी. ( File Photo: PTI)
त्योहारों के सीजन में CJP के प्रदर्शन से व्यापार प्रभावित, मुंबई के व्यापारियों ने जताई नाराजगी. ( File Photo: PTI)

त्योहारों के सीजन में खरीदारी के बीच CJP के विरोध प्रदर्शनों को लेकर मुंबई के व्यापारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है. व्यापारियों का कहना है कि शहर के प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में हो रहे प्रदर्शनों के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. इससे दुकानदारों को कारोबार में नुकसान उठाना पड़ रहा है. व्यापारियों ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे अपना विरोध दर्ज कराने के लिए निर्धारित स्थानों का चयन करें, ताकि आम लोगों और दुकानदारों को परेशानी का सामना न करना पड़े.

वीरेन शाह ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर शहर की सामान्य गतिविधियों को बाधित करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए बाजारों का रुख करते हैं. ऐसे में अगर बाजारों के आसपास प्रदर्शन होते हैं, तो ग्राहक वहां जाने से कतराते हैं और व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ता है.

वीरेन शाह के मुताबिक, कोविड के बाद से ही ऑनलाइन शॉपिंग की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है. ऐसे में अगर बाजारों में लगातार इस तरह की स्थिति बनी रहती है, तो ग्राहक दुकानों पर जाने के बजाय ऑनलाइन खरीदारी को प्राथमिकता दे सकते हैं. इससे पहले से चुनौतियों का सामना कर रहे छोटे और बड़े व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

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विरोध करने का अधिकार

वीरेन शाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को अपना विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए किसी निर्धारित स्थान या मैदान का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. शहर के बीचों-बीच प्रदर्शन होने से न केवल दुकानदारों, बल्कि आम नागरिकों को भी परेशानी होती है. उन्होंने अभिजीत से अपील की कि वे अपने विरोध प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए इस बात का ध्यान रखें कि आम जनता और व्यापारियों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े. वीरेन शाह ने कहा कि वह या उनका संस्थान किसी पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है.

व्यापारियों ने यह भी कहा कि किसी प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसके कारण आम जनजीवन प्रभावित न हो. उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कई बार आम लोग भी ऐसी परिस्थितियों में फंस जाते हैं, जिनसे बचना उनके लिए मुश्किल हो जाता है.

स्थानीय ग्राहकों ने भी जताई नाराजगी

वहीं, खरीदारी के लिए बाजार पहुंचे लोगों ने भी विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. कुछ लोगों का कहना था कि लंबे समय से चल रहे प्रदर्शनों के कारण दुकानदारों और ग्राहकों, दोनों को परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन को समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि बाजारों में सामान्य गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें.

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व्यापारियों का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, इसलिए अब कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हुए प्रदर्शन को समाप्त करने पर विचार किया जाना चाहिए. उनका स्पष्ट कहना है कि विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन त्योहारों के समय आम जनता, दुकानदारों और शहर के कारोबार को परेशानी में डालना उचित नहीं है.

व्यापार न हो प्रभावित

प्रदर्शनकारियों को अपने विरोध का अधिकार बनाए रखते हुए ऐसी जगहों पर प्रदर्शन करना चाहिए, जहां आम लोगों की आवाजाही और व्यापार प्रभावित न हो. त्योहारों के इस महत्वपूर्ण समय में बाजारों का सुचारू रूप से चलना व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों के हित में भी जरूरी है. हालांकि, प्रदर्शन पर बैठे प्रदर्शनकारी और शिवसेना उद्योग बालासाहेब ठाकरे पार्टी के नेता अवधेश शुक्ला का कहना है कि जो व्यापारी विरोध कर रहे हैं, वह सत्ता पक्ष के ही लोग हैं और बीजेपी के कहने पर ही उनके विरोधी शोर सुनाई दे रहे हैं.
 

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