महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले के जामगिरी गांव में प्रसव के दौरान 27 वर्षीय गर्भवती महिला की मौत का मामला सामने आया है. महिला की डिलीवरी के कुछ ही मिनट बाद उसके नवजात बच्चे की भी मौत हो गई. घटना के बाद परिवार ने सरकारी अस्पताल में समय पर डॉक्टर और जरूरी इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाया है. परिजनों ने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है.
जानकारी के मुताबिक, महिला अपनी पहली डिलीवरी के लिए 23 अगस्त की सुबह जामगिरी स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती हुई थी. परिजनों का कहना है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद भी सुबह करीब साढ़े 10 बजे तक अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे. इस दौरान परिवार लगातार महिला की तबीयत को लेकर अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों से जानकारी लेता रहा. परिजनों के मुताबिक, अस्पताल में मौजूद नर्सों ने उस समय महिला की हालत ठीक होने की बात कही थी. हालांकि, कुछ समय बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी. हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए गड़चिरोली के सरकारी अस्पताल रेफर किया गया.
परिवार का आरोप है कि जामगिरी के अस्पताल में समय पर चिकित्सकीय उपचार और डॉक्टर की उपलब्धता नहीं होने के कारण महिला की हालत लगातार खराब होती चली गई. गड़चिरोली के सरकारी अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद परिजनों को बताया कि गर्भ में ही बच्चे की धड़कन बंद हो चुकी थी. इसके बाद महिला की डिलीवरी कराई गई, लेकिन जन्म के कुछ ही मिनट बाद नवजात बच्चे की मौत हो गई. नवजात की मौत के कुछ समय बाद महिला की हालत भी बेहद गंभीर हो गई. डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान महिला ने भी दम तोड़ दिया.

मां और नवजात की मौत से परिवार में मातम
एक साथ मां और नवजात बच्चे की मौत से परिवार में मातम पसर गया. जिस घर में पहली संतान के जन्म की खुशी की तैयारी थी, वहां कुछ ही घंटों में मातम छा गया. घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार ने अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर महिला को प्रसव के दौरान समय पर डॉक्टर और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी. परिजनों का दावा है कि सरकारी अस्पताल में दो महिला डॉक्टर होने के बावजूद डिलीवरी के समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था.
इस घटना ने ग्रामीण सरकारी अस्पतालों में प्रसव और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. खासकर प्रसव के दौरान डॉक्टर की मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में गर्भवती महिला या बच्चे की हालत कभी भी गंभीर हो सकती है. परिजनों ने पूरे मामले की गहन जांच कराने, इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय करने और सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की मांग की है. फिलहाल परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला और नवजात की मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या थे और इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं.