महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति से गंभीर समस्या बनी हुई है. मराठवाड़ा क्षेत्र में किसानों की फसलें बरबाद हो रही हैं और इसे लेकर लातूर जिले के किसान सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे को लेकर पहला नोटिफिकेशन शनिवार से पहले जारी किया जाएगा. इस नोटिफिकेशन में यह जानकारी होगी कि किन इलाकों में सूखे जैसी हालत है और वहां सरकार कौन कौन से कदम उठाएगी. मंगलवार को सीएम फडणवीस ने सूखा ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया.
इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी स्थिति जानी. मराठवाड़ा क्षेत्र में पढ़ रहे सूखे के चलते खेतों में सूख रही फसलों का जायजा लेने के चलते सीएम फडणवीस लातूर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने लातूर जिले के निलंगा तहसील के जाऊ और खरोसा गांव में जाकर सूखाग्रस्त खेतों का जायजा लिया.
पानी की कमी से सूखीं खरीफ की फसलें
इस वक्त भावुक होकर एक किसान ने देवेंद्र फडणवीस के गले लगकर रोते हुए अपनी व्यथा बताई और फूट-फूटकर रोने लगा. पीड़ित किसान ने कहा कि, इस साल सोयाबीन की फसल की बुवाई के लिए पर प्रति एकड़ पच्चीस हजार और पर हेक्टर पचास हजार रुपयों की लागत लगी है, लेकिन इस साल भी मॉनसून का सीजन सूखा ही निकल जाने से अब तक जिले में बारिश नहीं हुई है.
इसके चलते अब सभी खरीफ की फसलें पानी की कमी के कारण सूख गई हैं. किसान ने रोते हुए कहा कि सरकार से विनती है कि पीड़ित किसानों को आर्थिक मुआवजा घोषित करें.
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इससे पहले सीएम ने फसलों का पंचनामा यानी नुकसान का हिसाब बुधवार से शुरू करने के आदेश दे हैं. राज्य सरकार अपने स्तर पर मदद देने के साथ साथ केंद्र सरकार से भी सहायता मांगने के लिए प्रस्ताव तैयार करेगी. राज्य के अधिकतर हिस्सों में फसलों पर असर पड़ा है. सबसे ज्यादा नुकसान मक्का और कपास की खेती को हुआ है, जबकि कोकण इलाके में धान की फसल भी प्रभावित हुई है.
पीने के पानी और जानवरों के चारे की व्यवस्था पर भी सरकार ने खास ध्यान देने की बात कही है. महानगरपालिका, नगरपालिका और पंचायत संस्थाओं को पानी की व्यवस्था पहले से तय करने के निर्देश दिए गए हैं. जमीनी हालात पर तुरंत फैसला लेने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे की अगुवाई में एक समिति बनाई गई है, जिसमें गिरीश महाजन और बाबासाहेब पाटील जैसे मंत्री भी शामिल होंगे.