महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की भर्ती में सख्ती के चलते 550 से ज़्यादा बिना वेरिफ़ाई किए गए मंत्री-कार्यालय के कर्मचारियों को हटाया गया. महाराष्ट्र की महायुति सरकार के मंत्रियों के कार्यालयों में आउटसोर्सिंग, लोनिंग और अनौपचारिक मौखिक आदेशों के जरिए काम कर रहे 550 से अधिक कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में वापस भेज दिया गया है.
मुख्यमंत्री कार्यालय समेत 40 मंत्री-कार्यालयों में मंजूर किए गए 904 अस्थायी पदों में से केवल 549 पद ही मानक प्रक्रियाओं से भरे गए थे, जबकि बाकी पदों पर बिना वेरिफ़ाई किए गए, अनौपचारिक नियुक्तियां की गई थीं.
यह कार्रवाई 25 अगस्त 2026 को जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी एक आदेश के तहत की गई है. इस आदेश में कहा गया था कि बिना उचित मंज़ूरी के नियुक्त किए गए, या जिनके जरूरी बैकग्राउंड चेक या ईमानदारी की जांच नहीं हुई है, वे सभी अधिकारी 10 सितंबर तक अपने मूल विभागों में लौट जाएं, वरना उनकी सैलरी रोक दी जाएगी.
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यह कदम महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस 2026 में हाल ही में हुए प्रशासनिक बदलावों के अनुरूप है. इन नियमों के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को व्यक्तिगत कैबिनेट मंत्रियों के फैसलों पर व्यापक वीटो अधिकार दिए गए हैं.
नई व्यवस्था के तहत, भविष्य में कर्मचारियों की किसी भी नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से कड़ी जांच और अंतिम मंज़ूरी की ज़रूरत होगी. यह सख्त कार्रवाई सभी मंत्रालयों के कामकाज पर मुख्यमंत्री का सीधा अधिकार मज़बूत करती है और राज्य के विभागों में लंबे समय से चली आ रही अनौपचारिक भर्ती प्रथाओं को खत्म करती है.