INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के बीच शिवसेना UBT को बड़ा झटका लगा है. उद्धव ठाकरे की पार्टी के प्रवक्ता और हिंदी भाषी चेहरा आनंद दुबे ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह पिछले कई महीनों से अंदर ही अंदर परेशान थे और भारी मन से यह फैसला लिया है.
आनंद दुबे ने कहा कि चुनाव आयोग और SIR को लेकर शिवसेना UBT ने जो रुख अपनाया है, वह उससे सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वह CJP के साथ काम नहीं कर सकते. दुबे ने कहा कि सरजील इमाम, उमर खालिद और ध्रुव राठी उनके आदर्श नहीं हैं. उनके आदर्श शिवाजी महाराज और वीर सावरकर हैं.
उन्होंने कहा, 'जिस ट्रेन में कॉकरोच हो, मैं उस ट्रेन में सफर नहीं करूंगा.' आनंद दुबे ने कहा कि जब उन्हें उचित प्लेटफॉर्म मिलेगा, तब वह उस पार्टी को जॉइन करेंगे. उनके इस्तीफे को महाराष्ट्र में MVA गठबंधन के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है. एक तरफ गठबंधन में एकजुटता की बात कही जा रही है, वहीं आनंद दुबे के इस्तीफे से गठबंधन को झटका लगा है.
राष्ट्र सबसे ऊपर होना चाहिए
इस्तीफे के बाद आनंद दुबे ने कहा कि देश के मुद्दे पर मतभेद और असहमति हो सकती है, लेकिन राष्ट्र सबसे ऊपर होना चाहिए. उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि वह 26 अप्रैल को पार्टी के सहयोगी और विधायी विंग के डिप्टी ऑर्गनाइजर गुलाबचंद मौर्य के साथ वहां गए थे. उन्होंने कहा कि उस समय इलाके में गोलीबारी का माहौल था. इस दौरान उन्होंने फारूक अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की और अपनी पार्टी के समर्थन का भरोसा दिलाया.
आनंद दुबे ने कहा कि ऐसे संकट के समय वरिष्ठ सांसदों और विधायकों को भी वहां जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि वह भले ही कोई बड़े नेता न हों और नगर निगम के पार्षद भी न हों, लेकिन बालासाहेब ठाकरे से प्रेरित होकर उनके अंदर एक शिवसैनिक की भावना है. उन्होंने कहा कि देश के सामने खड़ा संकट सबसे बड़ी चिंता है. पार्टी और वह खुद बाद में आते हैं, लेकिन देश सबसे पहले है. आनंद दुबे ने कहा, 'मेरा राष्ट्र पहले, मेरा भारत पहले.'