झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) अपने 34 विधायकों के दम पर जीत के लिए जरूरी 28 मतों के आंकड़े से 6 मत अधिक होने के कारण अपनी एक सीट को लेकर पर पूरी तरह आश्वस्त है. राज्य में चल रही हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली इंडिया गठबंधन सरकार को कुल 56 विधायकों का मजबूत समर्थन प्राप्त है, जिससे गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते 16 विधायकों वाली कांग्रेस भी दूसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेगी. कांग्रेस को जीत के लिए अतिरिक्त 12 मतों का जुगाड़ करना होगा, जिसके लिए उसे जेएमएम के बचे हुए अतिरिक्त वोटों और गठबंधन के अन्य विधायकों से पूरी उम्मीद है.
इसके विपरीत, विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास कुल 24 विधायक मौजूद हैं, जिससे उसके स्थानीय उम्मीदवार को जीत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए केवल 4 और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी. ये पूरा चुनाव स्वर्गीय शिबू सोरेन और बीजेपी के दीपक प्रकाश का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हुई सीटों को भरने के लिए कराया जा रहा है, जिसमें धनबल, हॉर्स ट्रेडिंग और अंतरात्मा की आवाज पर क्रॉस वोटिंग के पुराने इतिहास को देखते हुए दोनों ही खेमे अपनी-अपनी जीत का बड़ा दावा ठोक रहे हैं.
झारखंड में कुल 81 सदस्यीय विधानसभा है, जिसमें सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का भारी बहुमत है.
इस आंकड़े को देखते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने आजतक से बातचीत में बड़ा दावा किया कि जब पर्याप्त संख्या में विधायक हमारे सरकार के खेमे में ही मौजूद हैं तो फिर किसी बात का डर और चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.
उधर, दूसरी सीट पर कांग्रेस से सीधी टक्कर है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने आजतक से कहा कि एनडीए के पास अपने 24 विधायक हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी यहां से एक स्थानीय उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी, जिसे आसानी से जीत हासिल होगी. क्योंकि राज्य के विधायक अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा झारखंड गठन और पीएम मोदी के विकास के विजन के नाम पर बीजेपी को वोट करेंगे.
झारखंड के इस राज्यसभा चुनाव का गणित बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है. एक तरफ 16 विधायकों वाली कांग्रेस पार्टी को अपनी नैया पार लगाने के लिए 12 और विधायकों के मतों की भारी जरूरत होगी. वहीं, दूसरी ओर विपक्षी एनडीए खेमे के पास कुल 24 विधायक पहले से ही मौजूद हैं, जिसके कारण उसे इस मुकाबले को जीतने के लिए केवल 4 विधायकों को ही मैनेज करना होगा.
गठबंधन की एकजुटता के दावों पर तंज कसते हुए बीजेपी ने पूछा कि कांग्रेस जेएमएम से मदद की बड़ी अपेक्षा रखती है, लेकिन क्या उसने बिहार, असम और बंगाल चुनाव में जेएमएम का समर्थन किया था. बीजेपी ने याद दिलाया कि बिहार में आरजेडी से उपेक्षा मिलने के बाद तो ऐसा लगता था कि जेएमएम झारखंड में राजद के मंत्री को कैबिनेट से ही ड्रॉप कर देगी.
झारखंड में राज्यसभा चुनावों के दौरान पहले भी कई बड़े सियासी खेल हो चुके हैं, जिसमें साल 2012 का प्रसिद्ध कैश कांड भी शामिल है. उस वक्त विधायकों में बांटने के लिए लाए जा रहे 2 करोड़ से ज्यादा रुपये पकड़े जाने के बाद मतदान तक को रद्द करना पड़ा था. यहां परिमल नाथवाणी, प्रेमचंद गुप्ता, आर के आनंद, पवन धुत, आर के अग्रवाल और केडी सिंह जैसे उद्योगपति भी भाग्य आजमा चुके हैं.