उत्तराखंड में चार निहंगों की गिरफ्तारी के विरोध में अब हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में पांवटा साहिब गुरुद्वारे में 150 से ज़्यादा निहंगों ने कब्जा कर लिया है. एक एजेंसी के मुताबिक ये निहंग अपने पंथ के उन चार सदस्यों की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें उत्तराखंड में स्थानीय लोगों के साथ झड़प के बाद गिरफ़्तार किया गया था. सूत्रों ने शनिवार को बताया कि निहंग समूहों ने आगे की कार्रवाई की योजना बनाने के लिए बातचीत की और घोषणा की कि जब तक गिरफ़्तार किए गए चारों सदस्य रिहा नहीं हो जाते, वे पंजाब वापस नहीं लौटेंगे.
गुरुवार को निहंगों के एक जत्थे ने देहरादून के रास्ते उत्तराखंड में ज़बरदस्ती घुसने की कोशिश की. जिसको लेकर उनकी पुलिसकर्मियों से बहस भी हुई. हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर निहंगों और देहरादून प्रशासन के बीच गतिरोध शुक्रवार को तब खत्म हुआ जब निहंगों ने उत्तराखंड की ओर अपना मार्च दो दिन के लिए टाल दिया.
निहंगों ने दिया 2 दिन का अल्टीमेटम
निहंग जत्थे का नेतृत्व कर रहे जगदीप सिंह अकाली ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि उत्तराखंड प्रशासन ने उनकी "मांगें पूरी करने" के लिए दो दिन का समय मांगा है, इसलिए उत्तराखंड में विरोध मार्च की योजना अगले दो दिनों के लिए रोक दी गई है. हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गिरफ़्तार निहंगों को रिहा नहीं किया गया तो वे अपना आंदोलन फिर से शुरू करेंगे.
16 जून को उत्तराखंड के चमोली ज़िले के कर्णप्रयाग बाज़ार में स्थानीय लोगों और निहंगों के एक समूह के बीच विवाद हिंसक हो गया. जिसमें कुछ स्थानीय लोग और एक निहंग घायल हो गए. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और चार निहंगों को गिरफ़्तार कर लिया.
गुरुवार शाम को निहंग जत्थे की पुलिस के साथ झड़प हुई और उन्होंने सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़कर उत्तराखंड में सिखों के तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब की ओर मार्च किया. पुलिस से मिलने के बाद, देहरादून में इकट्ठा हुआ समूह पुलिस की सुरक्षा में वहां से निकला और अंतर-राज्यीय सीमा से कुछ किलोमीटर दूर पोंटा साहिब गुरुद्वारे में शरण ली.
नगरासू गुरुद्वारे पर 20 जून को निहंगों ने कर लिया था कब्जा
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेंद्र डोबाल ने कहा कि कुछ लोगों ने सीमा पर चेकपॉइंट पार किया था और एक-दो गाड़ियां भी आगे बढ़ गई थीं, लेकिन बातचीत के बाद वे वापस लौटने पर सहमत हो गए. एक अन्य घटना में 20 जून को बद्रीनाथ हाईवे पर स्थित नगरासू गुरुद्वारे की छत पर लगभग आधा दर्जन निहंग चढ़ गए और एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को बंधक बना लिया. उन्होंने कर्णप्रयाग झड़प में गिरफ़्तार लोगों की रिहाई की मांग की. स्थानीय प्रशासन गुरुद्वारा प्रबंधन और पंजाब से आए संप्रदाय के सदस्यों के बीच बातचीत के बाद 23 जून को धार्मिक स्थल को खाली करा लिया गया.