हरियाणा के पंचकूला में स्कूल के अंदर मासूम बच्ची से कथित मारपीट का मामला सामने आया है. घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. अस्पताल के बिस्तर पर बेसुध पड़ी बच्ची को देखकर परिजन बार-बार उससे आंखें खोलने और कुछ बोलने की गुहार लगा रहे हैं. परिवार का यह भावुक वीडियो सामने आने के बाद घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे चंडीगढ़ PGI में भर्ती कराया गया है.
दरअसल, यह घटना पंचकुला के सेक्टर-20 स्थित शहीद मेजर अनुज राजपूत राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल की है. यहां KG में पढ़ने वाली विशेष जरूरतों वाली बच्ची पर तीसरी कक्षा के एक छात्र ने कथित तौर पर पत्थरों और गमले से हमला कर दिया. आरोप है कि हमले के दौरान बच्ची को इतनी गंभीर चोटें आईं कि वह बेहोश हो गई. इसके बावजूद आरोपी छात्र उसे काफी देर तक घसीटता रहा और उस पर पत्थरों से वार करता रहा.
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बताया जा रहा है कि घटना के बाद बच्ची को आनन-फानन में सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया. वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे PGI चंडीगढ़ रेफर कर दिया. इस मामले में अब परिवार ने स्कूल प्रबंधन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
पिता के बुलाने का बहाना बनाकर पहली मंजिल पर ले गया छात्र
बच्ची के परिजनों का आरोप है कि तीसरी कक्षा का वही छात्र उन्हें स्कूल के अंदर घायल बच्ची के पास लेकर पहुंचा, जिस पर मारपीट करने का आरोप है. बच्ची के चाचा ने बताया कि जब परिवार के लोग उसे तलाशते हुए स्कूल पहुंचे तो आरोपी छात्र ही उन्हें उस जगह लेकर गया, जहां बच्ची बेसुध हालत में पड़ी थी.
परिजनों के मुताबिक, आरोपी छात्र ने बच्ची को उसके पिता के बुलाने का बहाना बनाकर स्कूल की पहली मंजिल पर पहुंचाया था. वहां उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई. परिवार का आरोप है कि पहले बच्ची को पत्थरों से मारा गया और फिर गमला उठाकर उस पर हमला किया गया. इसके बाद उसे काफी देर तक घसीटा भी गया.
इस घटना को लेकर परिजनों ने स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यदि सभी कैमरों की मॉनिटरिंग प्रिंसिपल के कार्यालय में होती है तो इतनी गंभीर घटना किसी की नजर में क्यों नहीं आई? परिवार का सवाल है कि समय रहते किसी शिक्षक या कर्मचारी ने बच्ची को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की. उनका कहना है कि यदि निगरानी व्यवस्था प्रभावी होती तो मासूम को इतनी गंभीर चोटें लगने से बचाया जा सकता था.
पुलिस ने शुरू की जांच, आरोपी छात्र का भी होगा परीक्षण
घटना की सूचना मिलते ही सेक्टर-20 थाना प्रभारी यशदीप और जांच अधिकारी प्रदीप कुमार पुलिस टीम के साथ स्कूल पहुंचे. पुलिस ने स्कूल प्रबंधन से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई है. इसके अलावा कथित तौर पर हमला करने वाले छात्र के माता-पिता से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके.
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आखिर इतनी कम उम्र के बच्चे ने इस तरह की घटना को कैसे अंजाम दिया. वहीं, आरोपी छात्र का चंडीगढ़ PGI में मानसिक और स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है. बताया जा रहा है कि उसकी उम्र करीब 8 साल है. इतनी कम उम्र होने के कारण उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
बच्ची के चाचा ने बताया कि उनके भाई बाइक लेकर स्कूल पहुंचे थे. उस समय लगभग छुट्टी हो चुकी थी और बच्ची का बैग बाहर रखा हुआ था. उन्होंने शिक्षकों से बच्ची के बारे में पूछा तो टीचर ने कहा कि वह कहीं गई होगी, आप तलाश कर लीजिए. इसी दौरान जिस छात्र पर बच्ची के साथ मारपीट करने का आरोप है, वह भी वहां मौजूद था. उसी बच्चे ने उनके भाई से कहा, "अंकल, मैंने आपकी बेटी को देखा है. वह ऊपर है. बच्चों ने उसे मारा है और वह कमरे के अंदर पड़ी है."
चाचा के मुताबिक, उनका भाई जब ऊपर पहुंचा और शीशे से अंदर देखा तो वहां खून ही खून फैला हुआ था और बच्ची बेसुध हालत में पड़ी थी. यह देखकर वह घबरा गए और बेहोश हो गए. उन्हें पानी डालकर होश में लाने की कोशिश की गई. इसके बाद करीब 10-15 मिनट तक कमरे का ताला खोलने के लिए चाबी की तलाश की गई. ताला खुलने के बाद बच्ची को तुरंत एल्केमिस्ट अस्पताल ले जाया गया.
परिजनों के मुताबिक, एल्केमिस्ट अस्पताल में बच्ची को करीब 5-6 घंटे तक रखा गया. इसके बाद उसे रेफर कर दिया गया. PGI चंडीगढ़ में भर्ती कराने के बाद बच्ची की जांच और इलाज शुरू हुआ. परिजनों का कहना है कि अब उसकी हालत पहले से बेहतर है.
पंचकुला की इस घटना पर हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान लिया है. आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है. आयोग ने मामले में स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है.
आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि आरोपी छात्र की उम्र करीब 8 साल होने के कारण मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई में अड़चन आ सकती है. ऐसे में आयोग किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) में संशोधन की सिफारिश करने पर विचार करेगा. इसके साथ ही स्कूलों में बच्चों के व्यवहार को समझने और उनकी मानसिक स्थिति पर ध्यान देने के लिए अभिभावकों की काउंसलिंग व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है.
मानव अधिकार आयोग करेगा घटना की गंभीर स्टडी, सरकार को भेजेगा सिफारिश
इस मामले को हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने भी गंभीरता से लिया है. आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जस्टिस ललित बत्रा ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की मानसिकता को समझने और उनके व्यवहार का समय रहते आकलन करने के लिए एक विशेष सिस्टम विकसित करने की जरूरत है. इसके लिए आयोग हरियाणा सरकार से सिफारिश करेगा.
जस्टिस ललित बत्रा ने कहा कि पंचकूला के सरकारी स्कूल में हुई इस घटना का आयोग गंभीरता से अध्ययन करेगा. इस दौरान स्कूलों की व्यवस्था में मौजूद खामियों की पहचान की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. उन्होंने बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति को समझने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया.
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की निगरानी और प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब पुलिस जांच के साथ बाल अधिकार और मानव अधिकार आयोग भी मामले की पड़ताल में जुट गए हैं.
स्कूल प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज
वहीं, पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित संस्कृति स्कूल में केजी कक्षा की मासूम बच्ची के साथ मारपीट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. स्कूल प्रबंधन पर जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
पुलिस की प्राथमिक जांच में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है. जांच के दौरान स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की निगरानी में गंभीर खामियां पाई गई हैं. इस मामले में पुलिस उपायुक्त अदिति सिंह का बयान भी सामने आया है.