वडोदरा की मांजलपुर सीट से बीजेपी विधायक और पूर्व राज्य मंत्री योगेश पटेल का सोमवार को 80 साल की उम्र में निधन हो गया. दिल की बीमारी के चलते वे पिछले चार दिनों से वडोदरा के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां दोपहर में उन्होंने अंतिम सांस ली. योगेश पटेल गुजरात की राजनीति का एक बेहद मजबूत और बेबाक चेहरा थे.
उनका राजनीतिक सफर तीन दशक से भी ज्यादा लंबा रहा, जिसमें वे कुल आठ बार विधायक चुने गए. उन्होंने साल 1990 में पहली बार जनता दल के टिकट पर रावपुरा सीट से विधानसभा चुनाव जीता था. इसके बाद 1995 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और फिर जीवन के आखिरी समय तक बीजेपी के साथ जुड़े रहे.

रावपुरा से मांजलपुर तक मजबूत पकड़
योगेश पटेल ने 1995 से 2012 तक रावपुरा सीट से लगातार विधायक के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. इसके बाद परिसीमन के बाद बनी मांजलपुर सीट से चुनाव लड़ने लगे. साल 2012 से वे लगातार इसी सीट से जीत दर्ज करते रहे. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में 76 साल की उम्र होने के बावजूद बीजेपी ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की.
योगेश पटेल साल 2019 से 2021 तक विजय रूपाणी सरकार में राज्य मंत्री भी रहे. हालांकि, मंत्री पद पर रहने के बाद भी वे जमीनी राजनीति से जुड़े रहे. उन्हें ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता था, जो जनता के मुद्दों को खुलकर उठाते थे. कई बार वे आम लोगों के सवालों को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलने से भी पीछे नहीं हटे.
दरअसल, छात्र जीवन से ही योगेश पटेल आंदोलनों में सक्रिय रहे थे. साल 1978 में दूध की बढ़ी कीमतों के खिलाफ आंदोलन के बाद वे चर्चा में आए थे. यही वजह रही कि वडोदरा में उनकी पहचान सिर्फ एक नेता के तौर पर नहीं, बल्कि जनता के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में भी थी. योगेश पटेल के निधन के बाद वडोदरा की राजनीति में शोक की लहर है.